सोमबाला कुमार

जन्म: 5 जनवरी, स्थान: खंडवा (मप्र.). माता: स्व. रुक्मणी सातले, पिता: स्व. स्वरूपचंद सातले. जीवन साथी: श्री पृथ्वीराज कुमार. सन्तान: पुत्री -01. शिक्षा: एम.ए. (संगीत- डॉ. हरिसिंह गौर वि.वि., सागर). व्यवसाय: संगीतज्ञ.  करियर यात्रा: वर्ष 1992 में विजिटिंग फेलो और विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में इंदिरा कला संगीत वि.वि., खैरागढ़ के छात्रों को ध्रुपद प्रशिक्षण. पिछले 30 वर्षों से संगीत शिक्षण और समारोहों में प्रस्तुतियां. उपलब्धियां/पुरस्कार: ध्रुपद सीखने के लिए वर्ष 1989 में उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत अकादमी द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति के लिए 5 प्रतिभागियों में से एक. वर्ष 1993 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्राप्त. सम्मान- सुर सिंगार संसद- मुंबई द्वारा सुरमणि सम्मान (1994), गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा– नई दिल्ली द्वारा संगीत रत्न अवार्ड (2005), मर्दाला अकादमी-भुवनेश्वर, ओडिशा द्वारा पूज्य पूजा सम्मान (2012), पटियाला आर्ट्स एंड कल्चर फाउंडेशन-पंजाब द्वारा अवार्ड ऑफ़ ऑनर (2012), द विजडम ट्री फाउंडेशन-बिलासपुर (छग) द्वारा स्व. पुष्पा मेमोरियल अवार्ड (2020) सहित अनेक सम्मान तथा पुरस्कार प्राप्त. संगीत प्रस्तुतियां- तानसेन समारोह-ग्वालियर, स्वामी हरिदास समारोह-मुंबई, बाबा हरवल्लव संगीत सम्मेलन-जालंधर, आरंभ ऑफ़ अनहद, भारत भवन-भोपाल, कुमार गंधर्व स्मृति समारोह-देवास, एबीसी आर्ट गैलरी-बनारस, एनसीपीए-मुंबई, ध्रुपद समारोह-जयपुर, भगवान दास स्मृति समारोह लखनऊ, ध्रुपद समारोह-पटना, (एनसीजेडसीसी इलाहाबाद) स्वर्गीय बागेश्वरी देवी स्मृति समारोह-वाराणसी (2006), संगीत समारोह- बड़ोदरा (गुजरात 2006), निनाद और बनयान ट्री, मुंबई द्वारा आयोजित जलसा कचेरी (2006), राजकुमारी इंदिरा स्मृति समारोह, खैरागढ़ (छग- 2008), चक्रधर समारोह रायगढ़ (छग- 2008), स्वरालय उत्सव- पालाघाट (2009), सूर्य उत्सव-तिरुवनंतपुरम (2009), सुनाद म्यूजिक कॉन्सर्ट-पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला, संगीत प्रभात-पटियाला आर्ट्स एंड कल्चर फाउंडेशन पंजाब (2012), तानसेन समारोह ग्वालियर (2012), गया पर्व (2014), एसआरए म्यूज़िक कॉन्सर्ट- आईटीसी, कोलकाता (2014), आईजीएनसीए द्वारा आयोजित बीएचयू वाराणसी का शताब्दी समारोह (2016), ध्रुपद मेला- तुलसीघाट वाराणसी (2017), त्रिदेव फाउंडेशन-नई दिल्ली, द्वारा ऑनलाइन म्यूज़िक कॉन्सर्ट (2020), तानसेन महोत्सव, ग्वालियर, (2020), अनुध्वनि आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी, काठमांडू (नेपाल) द्वारा ऑनलाइन कॉन्सर्ट (2021) आदि. स्पिक मैके द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित विरासत कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित मंचों से अनेक प्रस्तुतियां. भीष्म साहनी द्वारा लिखित कबीरा (म्यूज़िकल ड्रामा) में संगीत निर्देशन. रुचियां: संगीत, संगीत और संस्कृति का प्रचार-प्रसार और पुस्तकें पढ़ना. अन्य जानकारी: शास्त्रीय संगीत का प्रारंभिक प्रशिक्षण श्री एम.डी. राजे और श्री एम.के.कवाथेकर से प्राप्त किया. विश्व प्रसिद्ध ध्रुपद गायक जिया फ़रीदुद्दीन डागर से ध्रुपद शैली की बारीकियां सीखने का अवसर प्राप्त हुआ. जहां कभी-कभी विश्व प्रसिद्ध वीणा-वादक स्वर्गीय उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर से भी विशेष मार्गदर्शन प्राप्त होता था. यहां उन्होंने भारत सरकार द्वारा प्राप्त राष्ट्रीय छात्रवृत्ति की मदद से अपना प्रशिक्षण पूरा किया. वर्ष 1999 से अब तक ध्रुपद और वॉयस कल्चर पर सैकड़ों कार्यशालाएं आयोजित. स्पिक मैके द्वारा आयोजित विभिन्न राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में ‘नाद-योग’ के रूप में नामित. एनसीज़ेडसीसी द्वारा इलाहाबाद रवींद्र भवन, पटना में ध्रुपद पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्याख्यान (2000). आई.के.एस. विवि., खैरागढ़ (1999 और 2000)  और गुरु नानक देव विवि. अमृतसर (2002) में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स) के लिए स्रोत व्यक्ति के रूप में आमंत्रित. यूजीसी की योजना के तहत, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय द्वारा व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित (2014), भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय, लखनऊ (यूपी) द्वारा ध्रुपद पर चार दिवसीय कार्यशाला के लिए आमंत्रण  (2017) आदि. पिछले तीस वर्षों से उनके मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से हजारों शिक्षार्थियों ने संगीत का ज्ञान और कौशल हासिल किया है. इनमें विदेशी शिक्षार्थी (श्रीलंका, अमेरिका, यूरोप आदि) भी शामिल हैं, जो हमारे देश की कला और संस्कृति का अपने-अपने देशों में प्रचार कर रहे हैं. पता: ‘राजफेमिली’. वार्ड -3, खैरागढ़ (छग) -81. ई-मेल: sombala.drupad@gmail.com

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