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सिविल जज परीक्षा में 69 प्रतिशत बेटियों ने मारी बाजी

सिविल जज परीक्षा में 69 प्रतिशत बेटियों ने मारी बाजी

छाया: देशबन्धु, टाइम्स ऑफ़ इंडिया, दैनिक भास्कर

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सिविल जज परीक्षा में 69 प्रतिशत बेटियों ने मारी बाजी

चयनित महिला उम्मीदवारों में 50 ग्रामीण क्षेत्र से

भोपाल। हाईकोर्ट द्वारा की जा रही सिविल जज वर्ग-2 के 137 पदों पर नियुक्ति के लिए हुई परीक्षा व इंटरव्यू में बेटियों ने 69 प्रतिशत यानी 94 पदों पर चयनित होकर इतिहास रच दिया। इससे पहले कभी भी इतनी बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार सिविल जज की परीक्षा में सफल नहीं हुई थी।  ख़ास बात यह है कि शीर्ष तीन रैंकिंग हासिल करने वाली केवल लड़कियां हैं। चयनित महिला उम्मीदवारों में भी करीब 50 से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जो उत्साहवर्धक है। इस परीक्षा में राजधानी के भी कई स्टूडेंट्स का चयन हुआ है। इनमें से कई ने पहले प्रयास में ही सफलता पाई।

घोषित रिजल्ट के मुताबिक प्रिया राठी 442 में से 277.33 अंकों के साथ प्रथम स्थान पर रहीं वहीं भोपाल की दीक्षा सिंह राठौर ने 273.83 अंक हासिल कर दूसरा स्थान तथा ज्योति फुस्केल ने 271.42 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है। ओबीसी वर्ग में हर्षा परमार, एसी वर्ग में रिया डेहरिया व एसटीवर्ग में भी महिला उम्मीदवार ऋतु प्रजापति ने अपने वर्ग की चयन सूची में प्रथम स्थान हासिल किया।

भोपाल की दीक्षा ने जवाहरलाल स्कूल, भेल से 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटियाला से 2020 में क़ानून की डिग्री हासिल की। पहले ही प्रयास में ही सफलता प्राप्त करनी वाली दीक्षा के पिता उमेश सिंह राठौर एलआईसी में वरिष्ठ अधिकारी हैं।

8वीं रैंक हासिल करने वाली रजनी मिरोठा ने ग्रेजुएशन से ही सिविल जज की तैयारी शुरू कर दी थी। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी से पासआउट रजनी का यह चौथा मौका था। वे 2017 से तैयारी में लगी थी। उनके पति मुकेश रजक व्यवसायी हैं। पिता नवल किशोर मिरोठा वकील हैं। उन्हें जज बनने की प्रेरणा पिता से मिली। उनके दो भाई विधि विभाग में हैं।

अपूर्वा पाठक को 12वीं रैंक मिली है। उनके पिता देवदत्त पाठक बैंक में कार्यरत थे और माता मंजुलता पाठक प्रोफेसर हैं। बचपन से ही समाजसेवा में जाना चाहती थी। जब कोर्ट में प्रेक्टिस के लिए जाती थी तो कई ऐसे लोगों से मिलती थी, जिनके पास केस लड़ने के लिए पैसे नहीं होते थे। तभी सोचा कि जज बनना है। अपूर्वा ने बैंगलुरु विवि से बीए एलएलबी आनर्स किया है।

15वीं रैंक प्राप्त करने वाली दिव्या विश्वकर्मा के पिता श्रीराम विश्वकर्मा महिला एवं बाल विकास विभाग में ड्राइवर हैं। यह उनका पहला प्रयास था। वे 2018 से परीक्षा की तैयारी में जुटी थी। उन्होंने केन्द्रीय विद्यालय नरसिंहपुर में स्कूली शिक्षा हासिल की है। इसके बाद उन्होंने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से बीएएलएलबी किया है। उनके पूरे खानदान में अभी तक कोई बेटी जज नहीं बनी है।

अपने पहले प्रयास में 32वीं रैंक हासिल करने वाली राधिका मूलत: उज्जैन की हैं। उन्होंने एनएलआईयू से बीएएलएलबी की डिग्री प्राप्त की  है। वे तीन साल से परीक्षा की तैयारी कर रही थीं।

जबलपुर की पारुल जैन ने 25वीं रैंक हासिल की है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से पीजी कर रही पारुल अपने परिवार की पहली सदस्य हैं, जो न्यायिक क्षेत्र में आई हैं। उन्हें पहले प्रयास में ही सफलता हासिल हुई है।

वहीं बैतूल की आयुषी मालवीय (ओबीसी कैटेगरी- चौथी रैंक) और कुमारी नेहा बाथरी ने परीक्षा में सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। नेहा के पिता सुनील बाथरी आमला न्यायालय में क्लर्क तथा माता श्रीमती मीना बाथरी एमपीईबी में लिपिक है।

नीमच की दो बेटियों को भी अपने प्रयासों में सफलता मिली है जिसमें जावद सिविल जज के ड्राइवर अरविंद गुप्ता की बेटी वंशिता ने पहले ही प्रयास में सातवीं रैंक हासिल कर सिविल जज की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके साथ ही पुस्तक विक्रेता जितेंद्र की बेटी दुर्गा ने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है। 

रीवा जिले की दो बहनों में से जसविता शुक्ला ने जहाँ पहला स्थान प्राप्त किया, वहीं उनकी बड़ी बहन अर्पिता ने भी अच्छे रैंक के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की। 

पिपरिया की  सुरभि कटकवार ने सिविल जज व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो की परीक्षा पास कर गृहणियों के लिये एक आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने विवाह के 14 साल बाद दूसरे प्रयास में सिविल जज परीक्षा पास की है। वे पूर्व पिपरिया नपा अध्यक्ष डॉ. सतीश कटकवार और सीमा कटकवार की बहू हैं। सुरभि ने विवाह के बाद ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एलएलबी, एलएलएल कंप्लीट किया। एलएलएम के दौरान ही उन्होंने सिविल जज बनने का लक्ष्य तय किया। 14 वर्ष तक वैवाहिक जिम्मेदारियों को संभालने के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।  वहीं आरएनए स्कूल के प्राचार्य बीएल रघुवंशी की पुत्री श्वेता ने भी पहले ही प्रयास में सिविल जज की प्रतियोगिता में सफलता अर्जित कर नगर एवं परिवार का नाम रोशन किया है। वर्तमान में श्वेता भोपाल में हैं, जहां से उन्होंने परीक्षा की तैयारी की। 

बेगमगंज की रहने वाली सोनल गुप्ता एडवोकेट राजकुमार गुप्ता की बेटी हैं। वे बताती हैं कि 12 वीं पास करने के बाद पिता ने उसने जज की कुर्सी पर बैठा देखने की इच्छा जाहिर की थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए इंदौर में रहकर टारगेट स्टडी की और सफलता को हासिल किया। सोनल ने 2016 में सागर विवि से बीए एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। वहीं 20वां स्थान हासिल करने वाली साक्षी दमोह के शिक्षक अजय मसीह की बेटी हैं। जिन्होंने हाल ही में विवि के दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय पदक हासिल किया था। 

शाजापुर की चारू नेमा ने प्रथम प्रयास में ही सिविल जज बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। चारू के पिता अशोक नेमा डॉक्टर और माता सविता नेमा गृहिणी हैं। चारू की 12वीं तक की पढ़ाई शाजापुर से ही हुई है। इसके बाद उन्होंने क्लेट की परीक्षा पास कर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से 2020  में लॉ की डिग्री प्राप्त की। चारू के अनुसार उन्हें सिविल जज बनने की प्रेरणा अपनी मौसी स्व. मोहनबाली नेमा से प्राप्त हुई जो कि अधिवक्ता रह चुकी हैं।

कंचन सैनिक को 53वीं रैंक मिली है। उनके पिता जगदीश सैनिक कोर्ट में बाबू हैं। कभी वे कोर्ट जाती थी तो उन्हें जज की बेंच बहुत आकर्षित करती थी। यही कारण है कि उन्होंने जज बनने का सपना देखा। वे डबरा गांव की पहली बेटी हैं, जो जज बनी हैं।

संदर्भ स्रोत टाइम्स ऑफ़ इंडिया, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, पत्रिका और देशबन्धु समाचार पत्र

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