सफिया खान

जन्म: 8 जून, स्थान: कानपुर (उ.प्र.). माता: श्रीमती शहनाज खान, पिता: श्री शकील मो. खान. शिक्षा: एम.ए (इतिहास))., एम.फिल (सोशल एंड इकोनॉमिक कंडिशंस ऑफ़ बुन्देलखण्ड), अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (2009), पी.एच.डी.- (बिल्डिंग ट्रेडिशंस इन बुन्देलखण्ड-(2013), पोस्ट डॉक्टरल फेलो. -‘बुन्देलखण्ड में सूफी मत का प्रचार प्रसार एवं दरगाह के अनुयायियों का जातीय एवं समाजशास्त्रीय अध्ययन’ दिल्ली यूनिवर्सिटी (2019).  करियर यात्रा: वनस्थली विद्यापीठ-राजस्थान में 2013-2015 तक सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्य किया. वर्तमान में बुंदेलखंड के ऐतिहासिक स्मारकों से संबंधित कला, भवन निर्माण परम्परा, जलस्रोतों तथा अन्य पर शोध कार्य जारी. उपलब्धियां/पुरस्कार: प्रकाशन- बुन्देलखण्ड के दस्तावेज की तीन पुस्तकें (3 संस्करण), 35 शोध व तीन प्रोजेक्ट पर शोध कार्य किये जा चुके हैं. तीन सेमिनार व तीन विषयों पर (1. मध्यकालीन बुंदेलखंड का सामयिक एवं सांस्कृतिक इतिहास 2. मध्यकालीन बुंदेलखंड की कला, साहित्य एवं स्थापत्य 3. विलुप्त होती बुंदेली संस्कृति) प्रदर्शनी. सम्मान- गुर्जर शोध संस्थान दतिया द्वारा ‘महारानी रतनकुंआरी जू सम्मान’ (2013), तुलसी समिति भोपाल द्वारा ‘तुलसी सम्मान’ (2015), वीरेन्द्र केशव संस्थान-टीकमगढ़ द्वारा ‘बुंदेलखण्ड सुरभि सम्मान’ (2016), महाराजा छत्रसाल गौरव संस्थान-मऊ सहारिया द्वारा ‘महाराजा छत्रसाल गौरव सम्मान’ (2016), छतरपुर बुंदेली विकास संस्थान द्वारा ‘दीवान प्रतिपाल सिंह सम्मान’ (2017). रुचियां: बुंदेलखंड की बिखरी संपदा को पुस्तक के माध्यम से संजोना, स्थानीय लोगों की कला व संस्कृति को जानना. अन्य जानकारी: एनजीओ ‘बुंदेलखण्ड विरासत अकादमी’ के माध्यम से बुंदेलखंड क्षेत्र पर निरंतर शोध कार्य जारी हैं. पर्यटक के रूप में बुंदेलखंड के ऐतिहासिक स्थलों को देखकर इन पर शोध करने की जिज्ञासा के चलते एमफिल. से लेकर अब तक की शोध यात्रा में चाहे वह शोध विषय हो, शोध पत्र, शोध परियोजना या फिर पुस्तक, सभी का विषय बुंदेलखण्ड ही है. पता: रामधाम कॉलोनी, वार्ड नं. 9, केशव भवन के पास, ओरछा, जिला-निवाड़ी. ई-मेल: safiyakhan.amu@gmail.com

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