शालिनी खरे

 

जन्म: 18 अप्रैल, स्थान: रीवा. माता: श्रीमती सविता खरे, पिता: श्री एस.सी. खरे. जीवन साथी: श्री शांतनु खरे. संतान: पुत्र -01. शिक्षा: एम.बी.ए. (फाइनेंस), एम.ए. (कथक नृत्य). व्यवसाय: निदेशक- ‘कथक नाद’. करियर यात्रा: शिक्षा के साथ-साथ वर्ष 2007 से 2014 तक बैंगलोर की एक फाइनेंस कंपनी में कार्य किया. कथक प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए मंचीय प्रस्तुतियां देती रही. वर्ष 2017 में ताल स्कूल ऑफ कथक (अब ‘कथक नाद’) की स्थापना के साथ ही नृत्य प्रशिक्षण तथा मंचीय प्रस्तुतियां जारी. दूरदर्शन में कलाकार तथा एंकर. उपलब्धियां/पुरस्कार: कारवां समिति जबलपुर द्वारा ‘नृत्यश्री’ सम्मान, साउथ की फिल्म ‘नरकसुर’ में मुख्य भूमिका. इन्टर कॉलेज डांस कॉम्पटीशन में प्रथम स्थान, संस्कार भारती की महाकौशल क्षेत्र की ‘नृत्य प्रमुख’ चयनित, मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर द्वारा आयोजित कथक कार्यशाला में 150 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण. प्रस्तुतियां- मालवा महोत्सव- इंदौर, खजुराहो-महोत्सव- खजुराहो, ‘उत्तराधिकारी डांस फेस्टिवल’ ट्राइबल संग्रहालय-भोपाल, नर्मदा महोत्सव-जबलपुर, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल –बैंगलोर, पं निखिल घोष स्मृति समारोह – जबलपुर, रोटरी क्लब डांस फेस्टिवल –जबलपुर, आईसीसीआर गुजरात (इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ कल्चर रिलेशन) एवं आईसीसीआर भोपाल, गढ़ कुंडार महोत्सव, मालवा महोत्सव, पंडित लच्छू महाराज महोत्सव जैसे कई प्रतिष्ठित महोत्सवों में नृत्य प्रदर्शन. रुचियां: खाली समय में अल्पसुविधा प्राप्त एवं विकलांग बच्चों को नि:शुल्क नृत्य सिखाना, गज़ल सुनना, कविताएं पढ़ना, परिवार के साथ वक्त बिताना. अन्य जानकारी: श्रीमती उमा डोगरा-मुंबई, श्री मुरारी शरण गुप्ता- बंगलौर, गुरु मुरली मोहन जी, कुमारी नंदिनी के मेहता, श्री किरोड़ी लाल जी भट्ट, श्री बिरजू महाराज, पं. अर्जुन मिश्रा से कथक का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया. अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर सामाजिक कार्यों में संलग्न. जलसा महोत्सव जबलपुर में 3 हजार लोगों के लिए गरबा लोक नृत्य की कोरियोग्राफी तथा प्रशिक्षण. बच्चों की शिक्षा और विकास को लेकर गांव की महिलाओं के लिए अनेक कार्यशालाएं आयोजित. सरकारी स्कूलों में निशुल्क सेवा. पता: 128-रवीन्द्र नगर, अधारताल, जबलपुर -04. ई-मेल: kathaktaintaal@gmail.com.

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