Now Reading
यशोधरा राजे सिंधिया

यशोधरा राजे सिंधिया

  छाया: हिंदी डॉट साक्षी डॉट कॉम

शासन क्षेत्र
राजनीति
प्रमुख हस्तियाँ

यशोधरा राजे सिंधिया

ग्वालियर रियासत के महाराज जीवाजीराव सिंधिया और माता विजयाराजे सिंधिया की पुत्री यशोधरा राजे सिंधिया का जन्म लंदन में 19 जून 1954 को हुआ था। अपने भाई-बहनों में वह सबसे छोटी हैं। उनकी अधिकांश स्कूली शिक्षा मुंबई में द कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल, फिर प्रेसेंटेशन कॉन्वेंट, कोडीकानल में हुई. बाद में अंतिम दो  साल उन्होंने सिंधिया कन्या विद्यालय, ग्वालियर में भी पढ़ाई की। इस स्कूल की स्थापना उनकी माता विजया राजे सिंधिया ने किया था । इसके बाद वह कभी कॉलेज नहीं गयीं।

यशोधराजी प्रारंभ से ही बगावती तेवर की रही हैं। मर्जी के खिलाफ समझौते करना उन्हें कभी गवारा नहीं हुआ। पारिवारिक परंपरा के विपरीत उन्होंने ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ भंसाली से सन 1977 में  विवाह करने का फैसला किया। डॉ. सिद्धार्थ राजघराने से नहीं थे, इसलिए उन्हें पारिवारिक विरोध का भी सामना करना पड़ा। परन्तु वह अपने फैसले पर अडिग रहीं।  अन्ततः दोनों परिवार के सदस्यों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए अपनी रजामंदी दे दी।  उनकी शादी राजसी वैभव से दूर बहुत ही सादगी से हुई। शादी के बाद वह अपने पति के साथ अमेरिका चली गईं । उनके तीन बच्चे हैं – पुत्र अक्षय एवं अभिषेक एवं पुत्री त्रिशला। अमेरिका में भी वह विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं।

विभिन्न कारणों से उनका वैवाहिक जीवन बहुत लम्बा नहीं चल सका। सन 1994 में वह पति से तलाक लेकर भारत लौट गयीं।  वह जीवन का शून्यकाल था, जिससे बाहर निकलने में उन्होंने देर नहीं लगाईं।  जीवनधारा राजनीति की तरफ मुड़ने लगी।  वह सबसे पहले वर्ष 1998 में भाजपा से विधानसभा के लिए शिवपूरी क्षेत्र से निर्वाचित हुईं। पुनः 2003 में विधायक के रूप में निर्वाचित होने के बाद वह पूरी तरह राजनीतिक जीवन में रम गईं।  वर्ष 2007 में ग्वालियर लोकसभा उपचुनाव जीतने के बाद शिवपुरी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया । अगले ही  वर्ष 2008 में शिवपुरी से उन्हें विधानसभा के लिए फिर टिकट मिल गया जिसमें वह विजयी रहीं।

2009 में पुनः ग्वालियर सीट से पंद्रहवीं लोकसभा से निर्वाचित हुई, उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अशोक सिंह को पराजित किया था।  इस जीत के बाद उन्हें रेलवे और महिला सशक्तिकरण समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। 2013 में वह वाणिज्य, उद्योग तथा रोजगार मंत्री और मध्यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम, भोपाल की अध्यक्षा बनीं। इसी वर्ष 13 दिसंबर को लोक सभा से इस्तीफा देकर शिवपुरी से उन्होंने विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुईं। पुनः  2018 में शिवपुरी से उन्हें विधानसभा का टिकट मिला और वह जीतीं।

हालाँकि अक्सर यशोधरा और वसुंधरा के राजनीतिक दबदबे पर तुलनात्मक चर्चा होती है और यह कहा जाता है कि मध्यप्रदेश में योशोधरा वह स्थान नहीं बना पायीं जो वसुंधरा ने राजस्थान में हासिल किया, तथापि इतना तो कहा ही जा सकता है कि जीवन के गति और लय का निर्धारण स्वयं करने में वह पूरी तरह समर्थ हैं। राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उन्हें अक्खड़ स्वभाव का माना जाता है। प्रदेश में अक्सर उनकी चर्चा लापरवाह अफसरों को फटकार लगाने के कारण होती है। वर्ष 2020 में कांग्रेस सरकार को गिराने के बाद जब भाजपा सत्ता में आई, प्रदेश भर की नज़रें यशोधरा और ज्योतिरादित्य पर टिक गईं। इससे पहले दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंदी माने जाते थे । राजनीतिक समीक्षकों का कयास था, कि दोनों के मध्य अहं का टकराव हो सकता है। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नही हुआ। ज्योतिरादित्य के पार्टी में प्रवेश से यशोधरा के कद पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्हें शिवराज मंत्रिमंडल में स्वाभाविक प्रवेश मिला।  उन्हें देखकर प्रतीत होता है लम्बी राजनीतिक पारी के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं।

संपादन – मीडियाटिक डेस्क 

 

 

शासन क्षेत्र

View Comments (0)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Website Designed by Vision Information Technology M-989353242

Scroll To Top