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मोनिका पुरोहित

मोनिका पुरोहित

छाया : मोनिका पुरोहित के एफबी अकाउंट से

विकास क्षेत्र
समाज सेवा
प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता

मोनिका पुरोहित

14 फरवरी को राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील में श्री पुरुषोत्तम दास शर्मा और श्रीमती पुष्प शर्मा के यहां जन्मी मोनिका का रुझान बचपन से ही सामाजिक कार्यों की तरफ रहा। शर्मा जी पहले भारतीय वायुसेना में कॉर्पोरल थे, फिर भारतीय स्टेट बैंक में प्रबंधक रहे, माँ पुष्पा जी गृहणी हैं। मोनिका की 12वीं कक्षा तक की शिक्षा बीएसएफ स्थित सेंट्रल स्कूल में हुई, फिर बी.एस.सी और फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा किया।  लेकिन समाज सेवा का जुनून दिलो दिमाग पर हावी था तो एमएसडब्ल्यू की डिग्री भी हासिल कर ली। उनका यह सपना इंदौर निवासी समाजसेवी ज्ञानेन्द्र पुरोहित से 2001 में विवाह बंधन में बंधने के बाद पूरा हुआ।

दरअसल 2000 में इंदौर में मूक-बधिरों के लिए काम करने वाले श्री पुरोहित ने शादी के लिए विज्ञापन दिया कि उन्हें मूक-बधिर लोगों के लिए काम करने की इच्छुक युवती की तलाश है। बस यहीं से मोनिका ने अपने भविष्य की दिशा तय कर ली और निश्चय  किया कि वे श्री पुरोहित से ही शादी करेंगी। शादी के बाद मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाने के लिए मोनिका ने विशेष रूप से बी.एड और एम.एड किया। और ज़्यादा सैद्धांतिक ज्ञान हासिल करने के लिए उन्होंने क्रॉस डिसेबिलिटी पर पीजी कोर्स भी किया और अपने मक़सद को पूरा करने में जुट गईं। मोनिका ने न सिर्फ साइन लैंग्वेज (संकेत भाषा) सीखी, बल्कि देश-विदेश के मूक-बधिरों पर गहन अध्ययन भी किया।

इंदौर में आनंद सर्विस सोसायटी की स्थापना ज्ञानेन्द्र वर्ष 1997 में कर चुके थे। विवाह के बाद सोसायटी का संचालन उन्होंने मोनिका को सौंप दिया, जिन्होंने एक नया आयाम जोड़ते हुए मूक-बधिर महिलाओं और बच्चों पर काम करना शुरू किया। वे भारत की एकमात्र ऐसी महिला हैं, जो इस विकलांगता से ग्रस्त बच्चों और महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने अभी तक ढाई हज़ार से भीअधिक मामलों में पीड़ितों की मदद की है। यौन शोषण और छेड़छाड़ की शिकार मूक बधिर/दिव्यांग महिलाओं के शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के अलावा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षित भी कर रही हैं। उनके प्रयासों से 3 सौ से अधिक मामलों –  जिनमें मूक बधिरों के साथ दुराचार हुआ, में आरोपियों को सजा हुई है।

आनंद सोसायटी में वर्तमान में करीब साढ़े 4 सौ विद्यार्थी रहते और पढ़ते हैं। इनके अथक प्रयासों से धार और अलीराजपुर जैसे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक रूप से विकलांग लड़कियों के लिए स्कूल और हॉस्टल खोले गए। इन लड़कियों को मोनिका आत्मरक्षा के गुर सिखाने के साथ ही अपना मामला दर्ज करने और न्याय दिलाने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रशिक्षित करती हैं। वे पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में पुलिस कर्मियों को संकेत भाषा और विकलांग लड़कियों और महिलाओं के मुद्दे सुलझाने का भी प्रशिक्षण देती हैं। उन्होंने विकलांग लड़कियों और महिलाओं को आजीविका के साधन उपलब्ध करवाकर उनके बचत खाते खुलवाए हैं। मप्र के ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों को संकेत भाषा सिखाई और  बैंक को पूरी तरह से शारीरिक रूप से अक्षम लड़कियों और महिलाओं के लिए पहला बैंक बनाने की पहल की। अब मूक बधिर महिलाएं अपने बचत खाते स्वयं संचालित करने लगी हैं।

मोनिका और ज्ञानेंद्र ने एक मामले में वीडियो कॉल के माध्यम से एक मूक बधिर दिव्यांग महिला को आत्महत्या करने से बचाया। राजस्थान के हनुमानगढ़ की एक मूक बधिर महिला ने फांसी लगाते हुए अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की। मोनिका ने उसे बचाने के लिए गूगल से हनुमानगढ़ के पुलिस अधिकारी का नंबर हासिल किया और उन्हें पूरी जानकारी दी। इस बीच उन्होंने उस महिला से वीडियो कॉल पर साइन लैंग्वेज में बात करते हुए लगातार 14 घंटे तक लगातार संपर्क बनाए रखा और उसे बचाने में सफल हुईं। एक अन्य घटना में पुरोहित दंपत्ति ने एक अनपढ़ बधिर युवती के इशारों को समझकर बलात्कारी की पहचान करने में मदद की और दोषी को सजा दिलाने में सफल रहे।

इस जोड़ी के जज़्बे का ही नतीजा था कि तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा पाकिस्तान से लाई गई मूक बधिर लड़की गीता के परिजन को खोजने की ज़िम्मेदारी जुलाई 2020 में उन्हें सौंप दी गई। पांच महीनों तक गीता पुरोहित परिवार के साथ रही। इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र व तेलंगाना के 10 शहरों में उसे लेकर उसके परिवार को खोजने की कोशिश की। इनके प्रयास से महाराष्ट्र के परभणी में गीता के परिजन के मिलने की संभावना जताई गई है। अब मोनिका इस कोशिश में जुटी हैं कि गीता और दावा करने वाली मां के डीएनए का मिलान जल्द हो सके।

लॉकडाउन  के दौरान भी पुरोहित दम्पति ने देश के 70 लाख मूक-बधिरों तक सूचना पहुंचाने के लिए एक यूट्यूब चैनल बनाकर संकेत भाषा के वीडियो के जरिए लॉकडाउन के बारे में जानकारी देने की कोशिश और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई।

आनंद सर्विस सोसायटी का उद्देश्य मूक बधिर बच्चों और महिलाओं को हर संभव तरीके से सामान्य जीवन देना है, ताकि उन्हें भी सुरक्षित भविष्य मिल सके। संस्था के बच्चे – जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है, अब सरकारी नौकरियों में हैं। वे अपने ही जैसे लोगों के लिए प्रशिक्षक बन गए हैं। मोनिका बताती हैं हमें काफी संघर्ष के बाद सफलता मिली है। उनका मानना है कि चुनौतियां तो होंगी, लेकिन बिना डगमगाए रास्ते पर चलते रहने से ही बेहतर नतीजे मिलते हैं। पुरोहित दंपत्ति के  दो बेटे हैं सार्थक और चिन्मय. मोनिका के दोनों बेटे भी साइन लैंग्वेज समझते हैं और अपने माता-पिता के कार्यों में हर संभव छोटी ही सही, लेकिन सहायता करते हैं।

उपलब्धियां/सम्मान:

1. मोनिका और ज्ञानेंद्र ने राष्ट्रगान जन गण मन और राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् को संकेत भाषा में वर्ष 2002 में पहली बार बनाया। इन गीतों को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोग से वर्ष 2006 में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।

2. वर्ष 2002 में इनके प्रयासों से इंदौर के तुकोगंज थाने में मूक-बधिर फ्रेंडली थाने की शुरुआत की। इस थाने की मदद से अब तक सैंकड़ों मूक-बधिर पीड़ितों को न्याय मिल चुका है।

3. मूक बधिर बच्चों को सामान्य स्कूलों में पढ़ने का अधिकार दिलाया। वर्ष 2004 से मूक बधिर बच्चों को सामान्य स्कूलों में प्रवेश दिया जाने लगा।

4. वर्ष 2011 में एलेक्स मेमोरियल अवार्ड।

5. वर्ष 2015 में महिला एवं बाल विकास विभाग की अनुशंसा पर देश की 100 सशक्त महिलाओं में मोनिका भी शामिल। उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सम्मानित किया।

6. वर्ष 2015 में स्टार प्लस पर ‘आज की रात है ज़िन्दगी’ कार्यक्रम में आमंत्रित। इस कार्यक्रम के मेजबान अमिताभ बच्चन थे।

7. वर्ष 2016 में ज़ीटीवी द्वारा ज़ीवुमन अचीवर अवार्ड।

8. वर्ष 2016 में जिंदल स्टील फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसिद्धा सेवा सम्मान। इसमें सम्मान स्वरूप एक लाख की राशि दी गई।

9. वर्ष 2017 में ज़ी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के  “द डीएससी शो” पर डॉ. सुभाष चंद्रा द्वारा सम्मानित।

10. वर्ष 2018 में रोटरी नेशन बिल्डर अवार्ड।

11. वर्ष 2019 में टाइम्स वुमन अचीवर अवार्ड।

12. वर्ष 2020 में 16 अक्टूबर को सोनी टीवी के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ कार्यक्रम में पति ज्ञानेंद्र के साथ आमंत्रित। इस शो में उन्होंने 25 लाख रुपये की राशि जीती।

13. वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा रिपब्लिक ऑफ़ वुमन ब्यूटी विद ब्रेन अवार्ड में विश्व की नामांकित एक हजार महिलाओं में तीसरा स्थान मिला। इसमें इन्हें पांच श्रेणी में अवार्ड मिले।

14.  सांख्यिकी मंत्रालय विभाग भारत सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘दि विजन ऑफ़ अन्त्योदय’ में पुरोहित दम्पति द्वारा किये जा रहे सेवा कार्यों को कहानी के रूप में दर्ज किया गया है। पुस्तक का लोकार्पण तत्कालीन उप राष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू द्वारा किया गया।

संदर्भ स्रोत: मोनिका पुरोहित से सीमा चौबे की बातचीत पर आधारित

© मीडियाटिक

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