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भोपाल की नवाब बेगमों ने किया था शिक्षा को प्रोत्साहित

भोपाल की नवाब बेगमों ने किया था शिक्षा को प्रोत्साहित

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शिक्षा
शिक्षा के लिए समर्पित महिलाएं

भोपाल की नवाब बेगमों ने किया था शिक्षा को प्रोत्साहित

देश में महिलाओं की शिक्षा का जिक्र करते हुए हम भोपाल रियासत की नवाबों द्वारा शिक्षा को लेकर किए गए कार्यों का उल्लेख करना नहीं भूल सकते। भोपाल रियासत की पहली महिला नवाब कुदसिया बेगम ने 1819 से 1837 तक राज किया था। वे अपने समय से बहुत ही आगे की सोच रखती थी। उन्होंने पर्दा प्रथा को अपनाने से इनकार कर दिया था और अशिक्षित होने के बावजूद महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिए जाने की पक्षधर थी। उन्होंने अपनी दो साल की बेटी को नवाब सिकंदर बेगम को अगला नवाब घोषित कर दिया था, जिसे सभी ने स्वीकार किया था। 1844 से 2868 तक अपने राज में नवाब सिंकदर बेगम ने अपनी रियासत में आधुनिकीकरण एवं विकास पर जोर दिया था। उनकी बेटी नवाब शाहजहां बेगम ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान किया था। नवाब शाहजहां बेगम का जन्म 29 जुलाई 1838 को इस्लामनगर में हुआ था। वे दो बार 1844-60 तक और 1868-1901 तक भोपाल रियासत की नवाब रही। इन्होंने मुहम्मदान एंग्लो-ओरियंटल कॉलेज अलीगढ़ की स्थापना में भरपूर सहयोग किया था। यह कॉलेज बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रूप में विख्यात हुआ। इन्होंने वहां तीन होस्टल सुल्तान जहां होस्टल, नसरुल्लाह होस्टल एवं ओबैदुल्लाह होस्टल बनवाया।

नवाब शाहजहां बेगम की बेटी सुल्तान जहां बेगम का जन्म 9 जुलाई 1858 को हुआ था। ये 1901 से 1926 तक भोपाल रियासत की नवाब रही। इन्होंने अपनी रियासत में शिक्षा को लेकर क्रांतिकारी कदम उठाए। इन्होंने 1918 में मुफ्त एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा लागू किया था। 1914 में वे अखिल भारतीय मुस्लिम महिला एसोसिएशन की अध्यक्ष रही थी। वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की संस्थापक चांसलर थी, उसके बाद विश्वविद्यालय में कभी भी कोई महिला कुलपति नहीं बन सकी। अपनी रियासत में उन्होंने तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित किया। महिलाओं को शिक्षित करने के लिए उन्होंने सुल्तानिया कन्या विद्यालय की नींव रखी, जिसे अब हम शासकीय सुल्तानिया कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नाम से जानते हैं। यह विद्यालय शाहजहांनाबाद में स्थित है। उन्होंने रफीका कन्या विद्यालय की स्थापना भी की थी, जिसका बाद में नाम बदलकर फाल्कॉन क्राइस्ट कर दिया गया। इसे उनके पोता नासिज मिर्जा चला रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए शिक्षा पर अखिल भारतीय कांफ्रेंस की वह पहली अध्यक्ष बनाई गई थी।

संदर्भ स्रोत- मध्यप्रदेश महिला संदर्भ 

 

 

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