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भोपाल की डॉ. रीनू ने जीता मिसेज इंडिया फार्म आइकन का खिताब

भोपाल की डॉ. रीनू ने जीता मिसेज इंडिया फार्म आइकन का खिताब

छाया: ट्विटर

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भोपाल की डॉ. रीनू ने जीता मिसेज इंडिया फार्म आइकन का खिताब

• साइंस में विशेष काम करने वाली 14 देशों की 20 महिलाओं को चुना गया

• 50 से ज्यादा रिसर्च पेपर हुए हैं पब्लिश

भोपाल की डॉ. रीनू यादव ने गोवा में मिसेज इंडिया फार्म आइकन का खिताब जीता। इसके लिए साइंस और एजुकेशन में विशेष काम करने वाली 14 देशों की 20 महिलाओं को चुना गया है। डॉ. रीनू के पिछले 10 साल में 50 से ज्यादा रिसर्च पेपर्स नेशनल और इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश हो चुके हैं। उनके नाम अब तक 4 पेटेंट हैं। वे 9 देशों में लेक्चर्स भी दे चुकी हैं। साथ ही 8 किताबें भी लिख चुकी हैं। फिलहाल वे भोपाल की एक यूनिवर्सिटी में डीन के पद पर काम कर रहीं हैं। रीनू का जन्म भी प्रदेश के अनूपपुर जिले साल 1982 में हुआ। वे बताती हैं कि उन्होंने अलग-अलग जगहों से पढाई की है। सबसे पहले उन्होंने बी.फार्मा किया. इसके बाद वे कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कदम रखना चाह रही थीं, इसके लिए उन्होंने एमबीए की पढ़ाई शुरू कर दी। पहले उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया और इसके बाद फार्मास्युटिकल साइंसेज में पीएच.डी की। उन्होंने किताबें, पेटेंट और अधिकतर रिसर्च पेपर हर्बल फार्मूलेशन पर लिखे हैं। उनका मानना है कि ये सारी चीजें महज कागज तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन्हें आम जिंदगी में भी इस्तेमाल करना चाहिए। वे कोशिश कर रही हैं कि उनके पेंटेट में दर्ज चीजों को इलाज के रूप में देखा जाए। डॉ. रीनू को नीदरलैंड की इंटरनेशनल फार्मास्यूटिकल फेडरेशन- विमेन इन साइंस एंड एजुकेशन की तरफ से राइजिंग स्टार-2022 अलॉन्ग साइड वुमन इन फार्मास्यूटिकल साइंसेस एंड एजुकेशन का अवार्ड भी मिला है।

रूरल एरिया में देती हैं सोशल सर्विस

डॉ. रीनू यादव अपने साथी डॉक्टर्स के साथ सोशल सर्विस भी करती हैं। उन्होंने बताया कि हम चार फीमेल डॉक्टर्स की टीम गांव-गांव जाकर वुमन हेल्थ कैंप लगाती है। इस कैंप में महिलाओं को मेंस्ट्रुअल हेल्थ और प्रेग्नेंसी डाईट के प्रति जागरूक किया जाता है। साथ ही ग्रामीण महिलाओं को फ्री में दवाइयां और सैनेटरी पैड्स भी मुहैया कराती हैं। इसके अलावा वे प्लांटेशन में भीं रुचि रखती हैं। इसके अलावा वे महिलाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी कैंपेन चलाती हैं। इसी के साथ उनके परिवार को जागरूक करने का काम भी करती हैं।

बच्ची की देती हैं फीस

करीब चार साल पहले उन्होंने एक बच्ची को गोद लिया था। दरअसल, रीनू की बेटी जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहीं की एक बच्ची के पिता की एक्सीडेंट में मौत हो गई। जिसके बाद आर्थिक तंगी के चलते उस बच्ची की मां उसे स्कूल से निकालना चाह रही थी। तब से ही रीनू उस बच्ची की फीस दे रहीं हैं।

संदर्भ स्रोत –दैनिक भास्कर 

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