बिशना चौहान

जन्म: 16 जनवरी, स्थान: नीमच. माता: श्रीमती श्यामा चौहान, पिता: स्व. श्री धनसिंह चौहान. शिक्षा: एम.ए. हिन्दी साहित्य तथा वर्तमान में एम.ए. (नाट्य शास्त्र) अध्यनरत. व्यवसाय: स्वतंत्र रंगकर्मी तथा सचिव ‘सागर गुंचा नटरंग’ कल्चरल एवं वेलफेयर सोसाइटी भोपाल. करियर यात्रा: 1992 से सागर में नाट्य संस्था “अन्वेषण” के साथ अभिनय यात्रा आरम्भ. गुरु ‘अलखनंदन’ का सानिध्य मिलने के बाद 1998 में उनकी नाट्य संस्था ‘‘नट बुंदेले’’ से जुड़ीं. सन 2000 से बतौर अभिनेत्री कार्य करना आरम्भ किया और अप्रैल 2012 तक कार्य किया. हिन्दी नाटकों का बुंदेली अनुवाद, मुंशी प्रेमचन्द, रविन्द्र नाथ टैगोर, सर हैंस एंडरसन तथा पंडित विष्णु शर्मा कृति पंचतंत्र की कहानियों का नाट्य रूपांतरण. कई मौलिक नाटक (मारासिम, भजिए वाली बुआ, औरते आफ़्टर द रेप, हिन्द ए भगत, शारदा “पापा मुझे मत मारो”, एकल नाटक लाईफ ऑन फ़ोन, नज़ीर नामा) प्रकाशित. कला पत्रिका ‘‘कला वसुधा’’ में नाटक ‘‘नजीरनामा’’ प्रकाशित. कोविड-19 से ग्रसित होने के बाद अस्पताल के अपने अनुभव पर आधारित एकल नाटक “एक खिड़की एक पलंग और सात दिन” का लेखन. बाल नाटक “नन्हा गोपी और दो परियां” “सच्ची दोस्ती”, “जोयका एक परी”, “जुमझुम और जंगल”, “बापू”, “छोटा जानवर बड़ी बीमारी”, “बा संग बापू”, “सैंटा क्लॉज” आदि का लेखन. उपलब्धियां/पुरस्कार: एक अभिनेत्री के तौर पर नाट्य संस्था नट बुंदेले में रंग यात्रा के समय भारत रंग महोत्सव में हिस्सेदारी के साथ देश के लगभग सभी नाट्य महोत्सव में भागीदारी. 1992 में लोकनृत्य ‘‘बधाई’’ के लिए राष्ट्रीय स्कॉलरशिप, 2007 में नाट्यकला के लिए जूनियर फेलोशिप प्राप्त, प्रभात गांगुली युवा रंगकर्मी सम्मान, यामिनी वेलफेयर सोसायटी की तरफ से युवा अभिनेत्री सम्मान. रुचियां: नाट्य लेखन, कविताएं, नज़्म, गज़लें लिखना और सुनना. अन्य जानकारी: बाल नाटकों का लेखन व बाल रंगमंच को विशेष रूप से विस्तार देना, जीवन का उद्देश्य. इसके लिए बाल नाट्य कार्यशालाओं का सतत आयोजन. लॉकडाउन के दौरान बाल नाट्य कार्यशाला के नाम से 50 दिवसीय बाल नाट्य कार्यशालाएं आयोजित.  बुंदेली बोली का संरक्षण तथा विस्तार,  पता: एचएस 395, शिव साईं मंदिर के पास, नया बसेरा, कोटरा, भोपाल -03. ई-मेल: bishna.chouhan@gmail.com

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