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प्रीति मान

प्रीति मान

छाया : स्व संप्रेषित

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पत्रकारिता, रेडियो और सोशल मीडिया
प्रमुख पत्रकार

प्रीति मान

प्रीति मान एक जानी मानी फ़ोटो पत्रकार हैं। उन्होंने कई वर्षों तक दिल्ली में बी बी सी – हिन्दी के लिये बतौर फ़ोटो पत्रकार काम किया है और आजकल स्वतंत्र फ़ोटो पत्रकार के रूप में कार्य कर रही हैं। प्रीति का जन्म 21 जुलाई 1980 को मध्य प्रदेश के धार जिले के एक छोटे से कस्बे धामनोद में हुआ जहाँ उनके पिता श्री लखवीर सिंह मान शासकीय औद्योगिक संस्थान ( आई टी आई ) में कार्यरत थे और उनकी माँ श्रीमती बीना मान शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। प्रीति की दो छोटी बहनें मनीषा मान और अमृता मान को मिला कर वे कुल तीन बहनें हैं।

माता – पिता के शैक्षणिक पदों पर होने की वजह से घर के माहौल का झुकाव शिक्षा की और अधिक था। परंतु प्रीति के माता – पिता ने उन्हें बचपन से ही पढ़ाई के अलावा खेलकूद व अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के लिये भी प्रोत्साहित किया। छोटा क़स्बा होने की वजह से सम्भावनाएं भी सीमित थीं। इसलिये जब प्रीति का चयन पाँचवी कक्षा के बाद धार ज़िले के ही मुल्थान स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में हो गया। नवोदय विद्यालय उस समय के बेहतरीन स्कूलों में गिना जाता था और वहाँ चयन होना सम्मान की बात थी। इस स्कूल ने प्रीति के सामने एक नया संसार खोल दिया।

नवोदय में प्रीति को शिक्षा के साथ साहित्य, कला,संगीत और खेल – सभी में अपने आपको आजमाने का मौका मिला, जिसने भविष्य के बीज बोने का भी काम किया। पढ़ने का शौक होने की वजह से प्रीति अक्सर लाइब्रेरी में पाई जाती थीं। बैडमिंटन, व्हॉलीबॉल , हाई जम्प, लॉन्ग रन, टेबल टेनिस आदि खेलों में वे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती थीं। इस संसार ने उनमें कला के प्रति रुझान पैदा किया जो आगे चलकर सामने आया। दसवीं पास करने के बाद प्रीति की माँ ने उनका दाख़िला अपने स्कूल में करा दिया।

यह प्रीति लिये एक बड़ा बदलाव था। अंग्रेज़ी माध्यम से अचानक हिन्दी माध्यम में आने पर उन्हें पढ़ाई में दोगुनी मेहनत करनी पड़ी। इसका सुपरिणाम यह हुआ कि  प्रीति बारहवीं कक्षा में कला विषय लेकर अपनी कक्षा में अव्वल आईं। उसके बाद आगे की पढ़ाई का सवाल आया। प्रीति प्रशासनिक सेवा की तैयारी करना चाहती थीं लेकिन उनके माता – पिता को लगा कि आगे के दौर में तकनीकी शिक्षा का महत्व ज़्यादा है, तो उन्होंने उनका दाख़िला इंदौर के महिला पॉलिटेक्निक के गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी विभाग में करा दिया यह तीन वर्ष का  पाठ्यक्रम था। प्रीति ने इसके साथ ही इंदौर के देवी अहिल्या वि.वि. से प्रीति ने प्राइवेट परीक्षा देकर कला स्नातक की डिग्री भी हासिल की।

पॉलिटेक्निक से निकलते ही प्रीति की नियुक्ति पंजाब के लुधियाना ज़िले की ड्यूक इंटरनेशनल में असिस्टेंट फैशन डिज़ाइनर के रूप में हो गई। क़रीब दस वर्ष उन्होंने फ़ैशन के क्षेत्र में कई पदों और नामचीन कंपनियों में काम किया। साल 2005 में जब वो दिल्ली एनसीआर की एक फ़ैशन कंपनी में कार्यरत थीं। उनकी माँ ने उन्हें सुझाव दिया कि वो एम.बी.ए. कर लें, जिससे उनके लिए भविष्य में बेहतर संभावनाएं खुल सकें। इस वक़्त तक प्रीति ने कैमरा उठा लिया था और वो ट्रेवल फ़ोटोग्राफ़ी शुरू कर चुकी थी और उनकी तस्वीरों को सराहा भी जा रहा था।

प्रीति ने इंदौर के आई पी एस कॉलेज के एम.बी.ए. के पार्ट टाइम कोर्स में दाख़िला लिया और दिल्ली में रहते हुए ही पढ़ने लगीं, साथ ही काम भी जारी रखा। इसी दौरान उनके कुछ मित्रों ने – जिनमें पत्रकार और चित्रकार भी थे, उन्हें पत्रकारिता और चित्रकारिता की और जाने को प्रोत्साहित किया। एक चित्रकार मित्र ने जो मध्यप्रदेश के ही रहने वाले थे, प्रीति को कैनवास, रंग और ब्रश देकर कहा की तुममें एक चित्रकार बनने की पूरी संभावना है तुम्हें एक कोशिश तो जरूर करनी चाहिये। इस तरह पढ़ाई के बीच मिलने वाले खाली समय में प्रीति चित्रकारी करने लगीं।

एक पत्रकार मित्र ने उनके चित्र जनसत्ता अख़बार के संपादक को  दिखाये तो संपादक महोदय ने उन्हें रविवारीय अंक के लिये चित्र बनाने का काम दे दिया। यहीं से प्रीति की कलाकार बनने की यात्रा की शुरुआत हुई। एम.बी.ए. समाप्त करने के बाद प्रीति ने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के फ़ाइन आर्ट्स कॉलेज में एडवांस फ़ोटोग्राफ़ी के कोर्स में दाखिला ले लिया। साथ ही पत्रकार मित्रों के कहने पर कला पर लिखना और चित्र बनाना भी जारी रखा। अब तक प्रीति की चित्रकार और छायाकार की पहचान बनने लगी थी।

2011 में इंडियन कॉउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशन्स ( दिल्ली ) के कला विभाग में उन्हें प्रोग्राम असिस्टेंट की नौकरी मिल गई, जिसके चलते प्रीति विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों के सान्निध्य में आयीं। उसी दौरान 2013 में मध्यप्रदेश कला परिषद द्वारा उन्हें खजुराहो नृत्य समारोह के फोटो डॉक्यूमेंटेशन हेतु आमंत्रित किया गया। खजुराहो नृत्य समारोह के वेबसाइट पर प्रीति द्वारा खींची गयी तस्वीरें देखकर बी.बी.सी. हिन्दी के संपादक ने प्रीति से संपर्क किया और वेबसाइट के लिए कला और संस्कृति पर फ़ोटो स्टोरीज़ करने के लिये कहा।

बी.बी.सी. के लिये काम करते हुये प्रीति ने आर्टिस्ट एट स्टूडियो नाम से एक ऑडियो विज़ुअल वीकली सीरीज़ की, जिसे बहुत सराहा गया।  इस सीरीज़ में देश के नामचीन कलाकारों जैसे रघु राय, बिरजू महाराज, गीता चंद्रन, अखिलेश,हर्षवर्धन स्वामीनाथन, भज्जू श्याम, भूरी बाई जैसे विश्व प्रसिद्ध कलाकारों पर फ़ोटो फ़ीचर और ऑडियो विज़ुअल इंटरव्यू ने फ़ोटो पत्रकारिता में उनकी अलग पहचान कायम कर दी। 2017 तक बी.बी.सी. हिन्दी से जुड़े रहने के बाद प्रीति दिल्ली में ही स्वतंत्र फ़ोटो पत्रकार और चित्रकार  के रूप में कार्य कर रही हैं।

 

संदर्भ स्रोत : प्रीति जी से सारिका ठाकुर की बातचीत पर आधारित  

© मीडियाटिक

 

 

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