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प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री

प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री

छाया : प्रियदर्शिनीजी के फेसबुक अकाउंट से

विकास क्षेत्र
विषय विशेषज्ञ

• सारिका ठाकुर

इंसान में ज़िद  और जुनून हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी मंज़िल तक पहुँच ही जाता है। वहीं अगर परिस्थितियां अनुकूल हों तो प्रतिभा को अपनी जगह बनाने में देर नहीं लगती। विपरीत परिस्थितियों में भी जो आकस्मिक या प्राकृतिक होती हैं उस पर किसी का नियंत्रण नहीं होता जबकि कुछ विपरीत हालात तो खुद अपने तैयार करते हैं जिसका सामना करना आसान नहीं होता। प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री ऐसी ही एक शख्सियत हैं। वे इंदौर महाविद्यालय की प्राचार्य हैं, लेकिन यह उनके परिचय का छोटा सा हिस्सा है। वास्तव में वे दुनिया भर के भूगोलवेत्ताओं के बीच अपनी पहचान बना चुकी हस्ती हैं। इसके अलावा वे तीन-तीन खेलों में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं, गिटार भी बजाती हैं और कविताएं भी लिखती हैं।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री का जन्म बैतूल जिले के साईंखेड़ा गाँव में 20 अगस्त 1969 को हुआ था। पांच भाइयों और दो बहनों में उनका स्थान छठवां है। उनके पिता श्री रमाकांत मिश्र सेन्ट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट में सुपरिटेंडेंट थे। उनकी माँ लक्ष्मी मिश्रा हालाँकि घर में रहकर बच्चों की देखभाल करती थी लेकिन वे उस ज़माने में संस्कृत, गणित और अंग्रेजी साहित्य से स्नातक थीं। छोटे-बड़े अंतराल पर मिश्र जी का तबादला होता और परिवार को इसके साथ अलग-अलग जगहों में रहने और वहां की संस्कृति को समझने का अवसर मिलता। घर की कमान पूरी तरह माँ संभालती थीं और वे बच्चों की शिक्षा को लेकर बहुत ही गंभीर थीं ।

प्रियदर्शिनी की प्रारंभिक शिक्षा अविभाजित मध्यप्रदेश के दुर्ग जिले में एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय में हुई, उसके बाद उनका परिवार स्थायी रूप से भोपाल में बस गया। उनका दाखिला कमला नेहरू स्कूल में करवा दिया गया। बचपन से ही प्रियदर्शिनी की रुचि खेल कूद में बहुत ज़्यादा थी। वे बैडमिन्टन, टेबल टेनिस, वालीबाल तीनों खेल पूरी दक्षता के साथ खेलती थीं। ख़ास तौर पर बैडमिन्टन, टेबल टेनिस में तो वे राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में उन्होंने अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व किया।

1986 में हायर सेकेंडरी करने के बाद सरोजिनी नायडू कॉलेज (नूतन कॉलेज) में हिंदी साहित्य, भूगोल और अर्थशास्त्र विषय लेकर उन्होंने स्नातक के लिए प्रवेश लिया। कॉलेज में खेल का साथ बना रहा और वे ओपन नेशनल खेलने लगी थीं। हालांकि माता-पिता ने खेलने से कभी मना नहीं किया। पिता खुद राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल के खिलाड़ी रह चुके थे, इसलिए प्रियदर्शिनी पर विशेष स्नेह भी रखते थे। लेकिन परिवार के मूल आचार संहिता में पढ़ाई सबसे ऊपर था। जब वे कॉलेज में थी, जूनियर इण्डिया कैम्प के लिए चालीस बच्चों का चयन हुआ जिसमें प्रियदर्शिनी भी थीं। लेकिन घर से अनुमति नहीं मिली और वे इसमें हिस्सा नहीं ले सकीं।

वर्ष 1989 में उनका ग्रेजुएशन पूरा हो गया और भूगोल विषय लेकर स्नातकोत्तर करने के लिए बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में उनका नामांकन हुआ। उन्होंने एक ही साल में चार अलग-अलग खेलों –  बैडमिन्टन, टेबल टेनिस,  वॉलीबॉल और हॉकी में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया जिसमें मिली सफलता के कारण विश्विद्यालय ने कलर अवार्ड से उन्हें नवाज़ा था। कलर अवार्ड किसी भी क्षेत्र में अप्रतिम प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी को दिया जाता था। यह दरअसल ब्लेज़र पर लगाया जाने वाला ख़ास ‘मोनो’ हुआ करता था  ।

वर्ष 1991में प्रियदर्शिनी को स्नातकोत्तर की उपाधि मिल गई, उसके बाद उन्होंने एमफिल करने का निश्चय किया। उनकी आयु की छात्राएं तब तक घर बसाने में व्यस्त हो चुकी थीं, लेकिन प्रियदर्शिनी के माता-पिता को उनके शादी की जल्दी नहीं थी। यह एक सही फ़ैसला भी था, क्योंकि एमफिल के तैयार किये गए शोधपत्र को उन्होंने अमेरिकी संस्था ‘इंस्टीट्यूट ऑफ़ इन्डियन ज्योग्राफ़र’ के लिए आयोजित कार्यक्रम में पढ़ा। यह आयोजन रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर में हुआ था जिसमें उन्हें ‘यंग ज्योग्राफ़र’ का पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 1999 में एमफिल पूरा हुआ, विश्वविद्यालय में उन्हें चौथा स्थान प्राप्त हुआ। पीएचडी के लिए प्रियदर्शिनी जी ने एमफिल के शोध विषय ‘विदिशा जिले के ग्रामीण सेवा केन्द्रों की पहचान एवं अधिवास: भूगोलीय अध्ययन’ को ही चुना क्योंकि इस विषय पर बहुत ही गहराई से काम किया था उन्होंने। इस शोध में उन्होंने लगभग सोलह सौ गाँवों को शामिल किया था। पीएचडी के लिए बचा हुआ मैदानी काम उन्होंने बहुत ही कम समय में पूरा कर लिया था।

इसी दौरान वर्ष 1995 में माता पिता की पसंद से उनका विवाह हो गया। उनके पति श्री पुनीत अग्निहोत्री एरिया मैनेजर के तौर पर जयपुर में कार्यरत थे। उनकी सास प्राचार्य थीं और ससुर एक कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख थे। ससुराल पक्ष के लोग आधुनिक सोच वाले थे इसलिए विवाह के बाद पीएचडी भी सहजता से हो गई। वर्ष 2000 में पुत्री और ——में छोटी बेटी के जन्म के बाद भी उनकी पेशेवर ज़िन्दगी में कोई मुश्किल नहीं आई क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को हर काम के लिए अल्पायु में ही प्रशिक्षित कर दिया था।

पीएचडी होने से पहले ही वर्ष 1999 में सहायक व्याख्याता के पद पर झुंझनू के विनोदिनी पीजी कॉलेज में नियुक्त हो गईं। वर्ष 2001 में गवर्नमेंट कॉलेज अजमेर आ गईं, उसके बाद पति के तबादले के कारण नौकरी छोड़ हरियाणा आ गईं। इसके बाद छोटे-छोटे कॉलेजों में वे अपनी सेवाएं देती रहीं। उन दिनों वे एक और महत्वपूर्ण काम अपने विषय पर जर्नल लिखने का काम कर रही थीं, जो अलग-अलग जगहों से प्रकाशित और प्रशंसित हो रहे थे। अब तक उनके 18 शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रूप से प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा वे बड़ी-बड़ी डिग्रियों के लिए भी पढ़ाई करती रहीं। इसलिए वर्ष 2007 में बी.एड. और वर्ष 2009 में शिक्षा में स्नातकोत्तर की डिग्री पाने में भी उन्हें मुश्किल नहीं आई। समय निकालकर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर की सभाओं और संगोष्ठियों में भी वे शामिल होती रही हैं।

प्रकाशन

•वॉटर रिसोर्स मैनेजमेंट एंड संसटेनेबल डेवलपमेंट इण्डिया : प्रकाशक : जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• इंटरनेशनल एनवायरमेंट जूरिसप्रूडेंस : ए ग्लोबल पर्सपेक्टिव: प्रकाशक : जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• इकॉनोमिक एनवायरमेंट: नेचर एंड सिग्निफिकेंस : प्रकाशक :  जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• एग्रीकल्चर चेंज : ए फ्यूचर अहेड : प्रकाशक : जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• एनवायरमेंटल फैक्टर एंड ह्यूमन हेल्थ : प्रकाशक : जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

•  एनवायरमेंट  डीग्रेडेशन : जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• डिजास्टर मैनेजमेंट इन इंडिया(सम केस स्टडीज): जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• मैनेजेमेंट इन रूरल डेवलपमेंट: जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• एन्वायरमेंट एंड इंजीनियरिंग: जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• एनवायरर्मेंटल क्राइसिस-चैलेंज एंड अपॉर्चुनिटी : जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• फिजिकल ज्योग्राफी : कुलदीप पब्लिशिंग हाउस

-बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी-सस्टेनेबल लाइफ: जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• एनवायरमेंट कोम्पेंडियम: जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• वेरियस आस्पेक्ट्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट: जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• बायोडायवर्सिटी कंज़र्वेशन इन इण्डिया: जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

• रेफरेंस लिटरेचर ओ ह्यूमेनिटिज : जेआरऍफ़ इंटरनेशनल पब्लिकेशन

पुरस्कार

• इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्कॉलर्स, बेंगलुर द्वारा रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड-  अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस (C- RAIBMS- 7th 8th June 2019) में बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड

• 7 एवं 8 जून 2019 को एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ एंड रिसर्च, इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन( IC-RAIBMS) में ‘अभिनव अनुसंधान की आवश्यकता को समझने की वृहद क्षमता’ के लिए पुरस्कृत

• 4 मई 2019 में नई दिल्ली में ‘कंट्रीब्यूशन टू स्टूडेंट डेवलपमेंट इन इंडिया, विषय पर आयोजित कांफ्रेंस में एजुकेशन अवार्ड

• वर्ष 2019 को सागर में आयोजित IC-IRSTM-2019 अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में अत्याधुनिक शोधकर्ता (Cutting Edge Researchers) अवार्ड

• एसडीएफ इंटरनेशनल द्वारा एक्सीलेंस इंटरनेशनल अवार्ड 2019  

• ज़ीरो माइल समाचार पत्र, द्वारा द्वारा ‘शिक्षा रत्ना ज़ीरो माइल अवार्ड-2019

• अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रोटरी क्लब द्वारा झाबुआ में  ‘राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना और रोटरी क्लब’  विषय पर आयोजित सेमिनार में ‘विशिष्ट सेवा अलंकरण-2019.

• मथुरा देवी ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूटस द्वारा जनवरी 2019 में आयोजित  ‘ग्लोबल एडवांसमेंट इन इंजीनियरिंग ऑन मैनेजमेंट फार्मेसी: साइंस एंड ह्यूमेनिटीज़’ विषय पर आयोजित 14वें वैश्विक सम्मलेन में ‘इनोवेटिव डेडिकेटेड वीमन टीचिंग प्रोफेशनल्स अवार्ड

• मंगलमय इंस्टीट्यूट एंड मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी और एकएएवी पब्लिकेशन द्वारा फरवरी 2019 में ‘मैनेजेरियल स्ट्रेटेजीज़ फॉर टेक्नोलॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन इन 21 सेंचुरी’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन में ‘अचीवमेंट ऑफ़ एक्सीलेंस इन करियर गाइडेंस अवार्ड.

• फरवरी  2019 रिसर्च फाउंडेशन ऑफ़ इण्डिया द्वारा ‘कंट्रीब्यूशन टू दी सोशल सेक्टर’ अवार्ड  

• सितम्बर 2018 में  WFSR, ITCV Consultingऔर   RFI  द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सम्मलेन में ‘प्रोफ़ेसर विथ एक्सीलेंस इन टीचिंग इन हायर एजुकेशन अवार्ड

• एसएजीई यूनिवर्सिटी, इंदौर द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ में ‘प्रोफ़ेसर विथ एक्सीलेंस इन टीचिंग इन हायर एजुकेश अवार्ड -2018

• बंसल न्यूज़ मप्र द्वारा ‘एजुकेशन आइकन अवार्ड-2018

• इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में उन्हें शिक्षा में योगदान हेतु पुरस्कृत व सम्मानित किया गया है.

सन्दर्भ स्रोत : प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री से सारिका ठाकुर की बातचीत पर आधारित

© मीडियाटिक

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