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दूरदर्शन पर प्रदेश की पहली महिला समाचार वाचक सलमा सुल्तान

दूरदर्शन पर प्रदेश की पहली महिला समाचार वाचक सलमा सुल्तान

छाया: सलमा सुलतान के एफ़बी अकाउंट से

प्रेरणा पुंज
अपने क्षेत्र की पहली महिला

दूरदर्शन पर प्रदेश की पहली महिला समाचार वाचक सलमा सुल्तान

 सलमा सुल्तान दूरदर्शन केंद्र दिल्ली में सन् 1967 से 1997 तक समाचार पढऩे और एंकरिंग करने वाली जाना-पहचाना चेहरा है। शिष्ट और आकर्षक सलमा को शुरुआती दिनों में दूरदर्शन से दो हजार रुपए मासिक वेतन मिलता था।  उस वक्त सलमा या किसी भी समाचार वाचक के लिए पैसा उतना महत्वपूर्ण नहीं था, जितना लोगों से जुड़ने का सुख। उनके लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण था कि पूरा देश उन्हें देख रहा है और समाचार वाचक के रूप में वे जनमासामन्य के बीच जाने-पहचाने जाते है।

सलमा का जन्म भोपाल में 16 मार्च को हुआ। उनके पिता मोहम्मद असगर अंसारी भोपाल रियासत में कृषि सचिव थे और मां मुगल परिवार की आदर्श गृहिणी। सलमा के व्यक्तित्व का निर्माण उनके पिता ने किया। वह नियमित रूप से नमाज अदा करती हैं और कुरान पढ़ती हैं। अपने माता-पिता की दूसरी संतान सलमा को अपनी बहन मैमूना सुल्तान से भरपूर प्यार मिला है। मैमूना प्रथम विधानसभा में सदस्य चुनी गईं थी। उसके बाद तीन बार सांसद रह चुकी हैं। महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज भोपाल से स्नातक करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए सलमा दिल्ली गईं और  इंद्रप्रस्थ कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर करने के बाद एक उद्घोषक और प्रस्तुतकर्ता के रूप में दूरदर्शन से जुड़ गईं। सन् 1967- 68 में युवाओं से समाचार पढ़वाने का जोर था। दूरदर्शन में उस वक्त प्रतिमा और गोपाल कौल- दो ही समाचार वाचक थे। एक दिन अचानक सलमा को त्वरित ऑडिशन देने को कहा गया।  हमेशा चुनौतियों का सामना करने को तैयार सलमा ने ऑडिशन दिया और घबराहट में 15 मिनट का बुलेटिन आठ मिनट में पढक़र खत्म कर दिया। उनकी इस घबराहट से  दूरदर्शन को यह अहसास हो गया, कि समाचार वाचकों को पहले प्रशिक्षित करना आवश्यक है। इसलिए बाकायदा सलमा को प्रशिक्षित किया गया, फिर शुरू हुई उनकी समाचार वाचन यात्रा, जो सन् 1997 तक जारी रही। बालों में गुलाब उनका प्रिय श्रृंगार था। सलमा कहती हैं, कि पहली बार जब दर्शकों ने उन्हें  गुलाबी साड़ी के साथ, मैच करते हुए बालों में गुलाब देखा, तो उनके पास ढेरों प्रशंसकों के फोन आए। तब से वे नियमित बालों में गुलाब लगाकर समाचार पढ़ने लगीं।

समाचार वाचन से अवकाश के बाद उन्होंने अपना प्रोडक्शन हाउस लेन्स व्यू प्राइवेट लिमिटेड बनाया और इसी बैनर तले स्वयं के निर्देशन में दूरदर्शन के लिए सामाजिक विषयों पर कई धारावाहिकों का निर्माण किया। इनमें सुनो कहानी, पंचतंत्र , स्वर मेरे तुम्हारे , जलते सवाल आदि प्रमुख है। कम बजट के चलते उन्होंने मुंबई में बीआर चोपड़ा द्वारा तैयार की गई महाभारत के सेट पर अनुमति लेकर पंचतंत्र की शूटिंग की। कला के प्रति ऐसी लगन को देखते हुए बीआर चोपड़ा ने उन्हें दाद दी।  खाने की बेहद शौकीन सलमा को घर पर महिलाओं के षड्यंत्रकारी भूमिकाओं से नफरत है। इसलिए उन्होंने कभी भी इस तरह के धारावाहिक का निर्माण नहीं किया। संगीत में रुचि रखने वाली सलमा सिंथेसाइजर, हारमोनियम और कम्प्यूटर तकनीक पर भी हाथ आजमाती हैं। वे एक कुशल इंटीरियर डिजाइनर भी हैं। सन् 1969 में  उन्हें दिल्ली में यूनाइटेड नेशन द्वारा बेस्ट पर्सनालिटी के खिताब से नवाजा गया था।

संदर्भ स्रोत- मध्यप्रदेश महिला संदर्भ

 

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प्रेरणा पुंज

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