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डॉ. शाम्भवी शुक्ला

डॉ. शाम्भवी शुक्ला

 

छाया : स्व संप्रेषित

सृजन क्षेत्र
संगीत एवं नृत्य
प्रसिद्ध कलाकार

डॉ. शाम्भवी शुक्ला

कथक रत्न डॉ. शाम्भवी शुक्ला का जन्म 4 मई को सागर, मप्र में प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी एवं कई विषयों के ज्ञाता लेखक श्री मुन्ना शुक्ला एवं संस्कृतिकर्मी डॉ. कविता शुक्ला के घर हुआ। शाम्भवी के भाई डॉ. सिद्धार्थ शंकर शुक्ला मैहर घराने के युवा सितार वादक हैं और पति श्री बृजेश मिश्र बनारस घराने के प्रसिद्ध गायक और संगीत रचनाकार हैं। डॉ. शाम्भवी की नृत्य शिक्षा चार वर्ष की आयु से ही प्रारंभ हो गई थी। बनारस घराने के स्व. पंडित प्रेम नारायण गुरु से उन्होंने कथक नृत्य की विधिवत शिक्षा ग्रहण की। तत्पश्चात सन् 1999 से जयपुर घराने के सुप्रसिद्ध कलाकार एवं गुरु पं. राजेन्द्र गंगानी द्वारा नृत्य दीक्षा प्राप्त की। शाम्भवी उनकी प्रथम गंडाबंध और वरिष्ठ शिष्या हैं।

अंग्रेज़ी साहित्य से स्नातक तथा संस्कृति साहित्य/कथक (गोल्ड मेडल) से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त शाम्भवी ने नृत्य प्रवीण में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। इसके अलावा तबला में जूनियर डिप्लोमा, कथक विषय में पीएचडी तथा नृत्य में यू.जी.सी. नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा सन् 2008 में छात्रवृत्ति तथा सी.सी.आर.टी. संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा सन् 2018  में प्रतिष्ठित कनिष्ठ अध्येतावृत्ति भी उन्हें प्राप्त हुई।

इंदिरा कला संगीत वि.वि., खैरागढ़ से सम्बद्ध टेक्निया कॉलेज (इंस्टिट्यूट ऑफ़ डांस, म्युज़िक एंड फाइन आर्ट्स) दिल्ली  एवं देश के प्रतिष्ठित कथक संस्थान ‘कथक-केन्द्र’ नई दिल्ली में गुरु पद पर कार्य करने के साथ ही 2015 में अंतर्राष्ट्रीय संस्था-आई.ई.एस. में विदेशी छात्राओं को कथक की शिक्षा भी प्रदान की। एमेटी अंतरराष्ट्रीय वि.वि., (नोएडा) में आमंत्रित सहायक प्राध्यापक शाम्भवी क्रिएटिव फाउंडेशन की संस्थापक/निदेशक भी हैं।

शाम्भवी कथक नृत्य की सशक्त हस्ताक्षर हैं। आप नृत्य के सैद्धांतिक और व्यवहारिक दोनों पक्षों पर समान अधिकार रखती है। 19 वर्ष की अल्पायु में ही दिल्ली दूरदर्शन की ग्रेडेड कलाकार बनीं। साथ ही दूरदर्शन की ‘ए’ ग्रेड कलाकार हैं। प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके बीस से अधिक गहन शोधपरक लेख प्रकाशित हैं। देश की प्रतिष्ठित संस्थानों (जैसे अतुल विद्यालय गुजरात, कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन, कथक केन्द्र नई दिल्ली इत्यादि) द्वारा कथक कार्यशालाओं के निर्देशन तथा शोध पत्र वाचन और व्याख्यान हेतु विभिन्न विश्वविद्यालयों में अतिथि विद्वान के रूप में आमंत्रित किया जाता है।

शाम्भवी ने बुंदेलखंड क्षेत्र में कथक के प्रचार प्रसार हेतु विभिन्न आयु वर्ग के सैकड़ों शिष्य-शिष्याओं को दस वर्ष तक नि:शुल्क कथक तालीम प्रदान की। इतना ही नहीं, नृत्य में नवाचार करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहली बार शास्त्रीय नृत्य कथक में उन्होंने ‘बुंदेली बोली’ का प्रयोग किया। वर्ष  2002 दिसंबर में उन्होंने डॉ. हरिसिंह गौर वि.वि. सागर में मुक्तिबोध सृजन पीठ द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में कला में आधुनिक कविता पर नृत्य प्रस्तुत करते हुए आधुनिक कविता तथा कथक के अंतरसंबंध को उजागर किया।

उन्होंने शैव दर्शन आधारित आनंद-भैरवी एवं नाट्यशास्त्र आधारित ‘पंचमवेद’- जो कि सुप्रसिद्ध दर्शन विद एवं लेखक पं. गौतम चट्टोपाध्याय द्वारा निर्देशित है) जैसी अनेक डाक्यूमेंट्री फिल्मों में अभिनय भी किया। मार्च 2018 में म.प्र. संस्कृति परिषद भोपाल की इकाई पाठक मंच सागर में उन्होंने जगदीश तोमर के  नीलकंठ का स्वप्न नामक उपन्यास की समीक्षा प्रस्तुत की। इसके अलावा आधुनिक कविता के क्षेत्र में कार्य करने वाली नई दिल्ली की संस्था ‘पोएसिस’ में फरवरी 2020 में स्वरचित कविताओं को नृत्य अभिव्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किया।

इन विविध साहित्यिक उपक्रमों के साथ-साथ शाम्भवी सांगीतिक एवं साहित्यिक गतिविधियां भी आयोजित करती हैं, जिनमें इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित ‘कथक-चतुष्टय’ और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘लोक से शास्त्रीय’ जैसे तीन दिवसीय कार्यक्रम शामिल हैं। शाम्भवी ने विगत तीन दशकों में स्वयं की मौलिक नृत्य शैली विकसित की है। उनके नृत्य प्रदर्शनों में कथक की प्राचीनता तथा आधुनिक नृत्य तकनीक का सुन्दर सम्मिश्रण दृष्टिगोचर होता है।

राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदर्शन

मांडू उत्सव, बाबा अलाउद्दीन खां संगीत समारोह मैहर, खजुराहो नृत्य उत्सव,  कालिदास समारोह उज्जैन, भारत भवन भोपाल, उदयशंकर नृत्योत्सव कोलकाता,  आनंदी उत्सव हुगली, ऑल बंगाल म्यूजिक कांफ्रेंस कोलकाता, पंडित कुंदनलाल गंगानी स्मृति समारोह कोलकाता, बसंत उत्सव एवं शिवरात्रि महोत्सव वाराणसी कथक महोत्सव, राष्ट्रीय कथक संस्थान लखनऊ, वलसाड गुजरात, मणिपुर उत्सव इम्फाल, स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन, सुर सिंगार मुंबई, इलाहाबाद,  रायपुर, पटना, देहरादून, आई.आई.सी. नई दिल्ली, रमादान फेस्टिवल – शारजाह, यू.ए.ई., संगीत नाटक अकादमी का फ़ेस्टिवल ऑफ़ इंडिया – वियतनाम, लंदन-यूके के नृत्य दौरे कुछ प्रमुख हैं।

उपलब्धियां

  • कथक की उत्कृष्ट पुस्तक ‘कथक-विनियोग’ प्रकाशित
  • यूनेस्को की यूनेस्को की इंटरनेशनल डांस काउंसिल पेरिस की सदस्या
  • इरसन संस्था, नई दिल्ली की पैनल कलाकार
  • भारतीय ललित कला संस्थान नई दिल्ली की बोर्ड ऑफ स्टडीज की मेम्बर
  • अंतर्राष्ट्रीय किरण समारोह कटनी म.प्र., NPCIL कोटा राजस्थान, GNCA नई दिल्ली इत्यादि प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में उपस्थित
  •  बुंदेलखंड सागर पर्यटन की ‘ब्रांड एम्बेसडर’

पुरस्कार एवं सम्मान

  • वर्ष 1999 में संगीत समाज पुरस्कार- टाटा नगर, जमशेदपुर
  •  वर्ष 2001 में संगीत कला रत्न- पटना, बिहार
  •  वर्ष 2003 में नृत्य प्रवीण- प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद
  •  वर्ष 2004 में ‘श्रृंगारमणि’ – सुर सिंगार संसद, मुम्बई
  •  वर्ष 2006 में सी वी एन एक्सीलेंस अवार्ड- टी.वी. चैनल
  •  वर्ष 2008 में प्रतिभा सम्मान- ललित कला मंडल, म.प्र.
  •  वर्ष 2010 में नेशनल यूथ एक्सिलेंस अवार्ड- हेल्दी यूनिवर्स फाउंडेशन, नई दिल्ली
  •  वर्ष 2010 में रोटरी इंटरनेशनल एप्रिसिएशन अवार्ड- नई दिल्ली
  •  वर्ष 2012 में ब्राह्मण रत्न सम्मान- नई दिल्ली
  • वर्ष 2013 में अभिनय स्वर्ण सम्मान- अभिनय कला परिषद, भोपाल म.प्र.
  •  वर्ष 2014 में महिला सम्मान- महिला दिवस समारोह सागर
  •  वर्ष 2014 में युवा श्रेष्ठ सम्मान- सागर
  •  वर्ष 2017 में कथक रत्न सम्मान- विश्वमित्र परिवार संस्था, नई दिल्ली
  •  वर्ष 2018 में यंग अचीवर्स अवार्ड- इलाहाबाद, म्यूजियम संस्कृति मंत्रालय, उप्र.
  •  वर्ष 2020 में पुनर्नवा सम्मान- कला लेखन हेतु मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन, भोपाल

 

संदर्भ स्रोत – स्व संप्रेषित एवं डॉ. शाम्भवी शुक्ला से सीमा चौबे की बातचीत पर आधारित

© मीडियाटिक

 

 

 

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