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डॉ. विभा दधीच

डॉ. विभा दधीच

छाया : स्व संप्रेषित

सृजन क्षेत्र
संगीत एवं नृत्य
प्रसिद्ध कलाकार

डॉ. विभा दधीच

डॉ. विभा दधीच का जन्म 12 मार्च 1954 को अविभाजित मध्यप्रदेश के बिलासपुर में हुआ। उनके पिता स्व. भ्रमर गुप्ता प्रसिद्ध गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी थे। उनकी माँ स्व. पूर्ण देवी गुप्ता रेलवे स्कूल में शिक्षिका थीं, जिन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका के रूप में प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जब भ्रमर गुप्ता जी को अंग्रेज़ों ने जेल में डाल दिया तो उनकी माँ गांधी जी के सन्देश महिलाओं के मार्फ़त जन-जन तक पहुंचाती थीं। माता-पिता ने एक कुशल अभिभावक की भांति विभा जी में दया-करुणा के साथ दृढ़ता और अनुशासन जैसे गुण विकसित किये, जो आगे चलकर कथक नृत्यांगना के रूप में उन्हें स्थापित करने में सहायक रही।

विभा जी ने 8 वर्ष की अल्पायु से रायगढ़ घराने के प्रसिद्ध दरबारी नर्तक  फिरतू महाराज से नृत्य प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। इसके बाद वे गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत प्रसिद्ध नर्तक पद्म श्री शम्भू महाराज की शिष्या बनीं, जिनसे उन्हें नृत्य के लखनऊ घराने की विशिष्टताएं विरसे में मिलीं, साथ ही उनके कला जीवन को एक ठोस आधार भी प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्हें प्रसिद्ध नृत्याचार्य पद्म श्री पुरु दधीच से भी सीखने का अवसर प्राप्त हुआ। जीवन की समान लय और ताल के कारण 12 फरवरी 1978 को दोनों परिणय सूत्र में बंध गए।

विभा जी ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से बीएससी और बीएड करने के बाद प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से प्रवीण, भातखंडे संगीत विद्यापीठ, लखनऊ से निपुण तथा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से नृत्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने ‘भारतीय नृत्य की वर्णमाला – हस्तमुद्रा’ विषय पर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

उनकी प्रतिभा को देखते हुए इन्हें मुंबई के सुर सिंगार संसद से ‘सिंगार मणि’ का सम्मान प्राप्त हुआ, जहाँ स्वयं सितारा देवी उनका मार्गदर्शन करती थीं। उसी दौरान विभाजी को चंडीगढ़ के ‘प्राचीन कला केंद्र’ से ‘नृत्य श्रृंगार’ का सम्मान प्राप्त हुआ। उनकी अप्रतिम प्रतिभा पर गृह राज्य(अविभाजित मध्यप्रदेश) के जानकारों  की भी दृष्टि पड़ी, वर्ष 1971 में उन्हें मध्य प्रदेश कला परिषद ने सम्मानित करते हुए नृत्य के एकल प्रदर्शन का विशेष कार्यक्रम भोपाल में आयोजित किया। उसी वर्ष विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन द्वारा आयोजित अंतर्विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में विभाजी  ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इसके बाद एक के बाद एक देश भर में आयोजित होने वाले विभिन्न नृत्य महोत्सवों में एकल प्रस्तुतियों का एक दौर सा चल पड़ा, जिनमें प्रमुख हैं – हरिदास संगीत सम्मलेन(मुंबई), भास्कर राव संगीत सम्मलेन (चंडीगढ़), जयदेव संगीत सम्मलेन(सिलचर), कथक प्रसंग(भोपाल), आमिर खान संगीत सम्मलेन(इंदौर), लखनऊ महोत्सव, रामायण मेला (चित्रकूट, अयोध्या, प्रयाग)

नृत्य कला में योगदान के लिए वर्ष 1993 में विभाजी को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा ने सम्मानित किया। वर्ष 1994 में उन्हें मप्र सरकार द्वारा चक्रधर फ़ेलोशिप प्रदान की गई। वर्ष 2013 में इन्हें संस्कृति विभाग से सीनियर फ़ेलोशिप प्राप्त हुई, जिसके अंतर्गत ‘कथक नृत्य अपरिहार्य अंग –गत निकास, अवधारणा, विभिन्न प्रकार एवं निकास पद्धति क्रियात्मक अध्ययन’ विषय पर डॉ. विभा ने गूढ़ शोध किया था।

डॉ. विभा दधीच पारंपरिक सीमाओं के भीतर रहते हुए भी एक प्रयोगवादी कलाकार हैं। संस्कृत और हिन्दी के काव्य छंदों पर आधारित उनकी नृत्य रचनाओं ने अत्यधिक ख्याति अर्जित की है। वर्तमान में वे नटवारी कथक नृत्य अकादमी, इंदौर की निदेशक के रूप में सक्रिय हैं जहां पिछले 30 वर्षों से वे अपने जीवन साथी पुरु दधीच के साथ नई-नई प्रतिभाओं को तराश रही हैं। यहाँ वे नृत्य विषय पर आधारित विशाल पुस्तकालय प्रबंधन के साथ-साथ पुस्तकों का संग्रहण भी कर रही हैं। नटवारी की इंदौर के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना में 7 शाखाएँ हैं। इस संस्था के माध्यम से वे अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर नृत्य शास्त्र के पाठ्यक्रमों पर शोधपरक काम कर रही हैं।।

किसी कला को जीवित रहने के लिए संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता होती है। डॉ. विभा इन सभी पहलुओं पर काम कर रही हैं। वे नई पीढ़ी के कलाकारों को मंच प्रदान कर रही हैं, कार्यशालाओं के आयोजन में लगातार यात्राएँ कर रही हैं। कथक विषय पर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कथक गुरुकुल विकसित कर रही हैं। मौजूदा वक्त की ज़रूरतों को देखते हुए उन्होंने एक वीडियो बुक ‘नृत्य सर्वस्व’ जारी की है। इसके अलावा उनके द्वारा रचित पुस्तक ‘नृत्य निबंध’, कथक पर आधारित लोकप्रिय पुस्तकों में से एक है। विभा जी को वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया है।

संदर्भ स्रोत – स्व संप्रेषित एवं डॉ. विभा जी से बातचीत पर आधारित 

© मीडियाटिक

 

 

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