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डॉ. विजया शर्मा

डॉ. विजया शर्मा

छाया : स्व संप्रेषित

सृजन क्षेत्र
संगीत एवं नृत्य
प्रसिद्ध कलाकार

डॉ. विजया शर्मा

सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं संस्कृत के प्रकांड विद्वान पं. रामकृष्ण शास्त्री (झाला) की पौत्री हैं कथक की विख्यात नृत्यांगना डॉ विजया शर्मा। 30 जून 1967 को महू मप्र में जन्मी डॉ विजया शर्मा जी ने कथक नृत्य को अपना जीवन समर्पित कर दिया। कोई ढाई बरस की रही होंगी तभी पिताजी ने नृत्य के प्रति इनका रुझान देखकर पड़ोस में चलने वाली कथक कक्षा में भेज दिया। तभी से इनकी नृत्य साधना शुरू हो गई जो अनवरत जारी है। बारह बरस की थीं तो अपनी काबिलियत के बदौलत ये भोपाल पहुंची और यहां चक्रधर नृत्य केंद्र में विधिवत कथक की शिक्षा प्राप्त की। इस दौरान राज्य सरकार द्वारा चार वर्ष तक स्कालरशिप प्रदान की गई। यहां रायगढ़ घराने की गुरु शिष्य परम्परा के वरिष्ठतम गुरु पंडित कार्तिक राम जी और उनके पुत्र पंडित रामलाल जी से शिक्षा ग्रहण की।

पं कार्तिक राम जी की आप गंडाबंध शागिर्द हैं। भारत सरकार संस्कृति विभाग द्वारा 1990 से 1993 तक आपको उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर की स्कॉलरशिप प्रदान की गई। 1994 से 1996 तक केंद्र सरकार की जूनियर फेलोशिप भी आपको मिली है। विजया जी ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से एम ए कथक, विशारद डांस, विशारद वायलिन  मेरिट के साथ किया और कथक में पीएचडी की है। यहां उल्लेखनीय है कि राज्य और केंद्र सरकार ने आपके हुनर को पहचानते हुए आपकी शिक्षा-दीक्षा के लिए पर्याप्त सहयोग दिया।

विजया जी को परिवार में नृत्य साधना में कभी अवरोध की स्थिति नहीं आई। पिता श्री गोपाल कृष्ण शर्मा के साथ साथ मां श्रीमती कमला शर्मा और दादी श्रीमती रूपा शर्मा का भी भरपूर समर्थन मिला। आपके पिता वैसे तो ग्रेसिम, नागदा में कार्यरत थे लेकिन संगीत और नृत्य में रुचि होने से उन्होंने अपने चारों बच्चों (तीनों बेटियों और बेटे) को भी संगीत या नृत्य की शिक्षा दिलवाई। विजया जी की बड़ी बहन चंद्रशेखर स्नातकोत्तर शासकीय महाविद्यालय, सीहोर में हिन्दी की प्राध्यापक होने के साथ शास्त्रीय गायिका हैं। दूसरी बहन सुश्री सीमा शर्मा उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में वकील हैं और कथक व सितार में पारंगत हैं। भाई व्यवसाय से जुड़े हैं, लेकिन तबला वादक भी हैं। दूसरी पीढ़ी में विजया जी की भतीजियां भार्गवी शर्मा (12 वर्ष) और देवांगी शर्मा (10 वर्ष) कथक की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए विजया जी से ही शिक्षा प्राप्त कर रही है। काफी कम उम्र में ही दोनों बच्चियों ने मंचीय प्रस्तुतियां साझा की है।

विजया जी ने अनेक विद्यार्थियों को नृत्य की शिक्षा दी है। कोरोना काल में आपके अधीन तीन शोधकर्ताओं की पीएचडी पूरी हुई और दो की लगभग होने वाली है। महामारी के इस कठिनतम दौर में आपके द्वारा बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है जो बेहद महत्वपूर्ण है। छोटे बच्चों को जबकि स्कूल,पार्क सभी बंद हैं घर में रखना अत्यंत मुश्किल होता जा रहा है, ऐसे में विजया जी ऑनलाइन कथक क्लास से जोड़कर इनकी ऊर्जा को सही दिशा दे रही हैं। अभी लगभग दो सौ विद्यार्थी आपसे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

सांस्कृतिक क्षेत्र में आपका योगदान सराहनीय रहा है। इनमें प्रमुख हैं दक्षिण मध्य क्षेत्र नागपुर द्वारा सन 1990 में खैरागढ़ में शास्त्रीय नृत्य साधना शिविर, उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत एवं कला अकादमी, भोपाल द्वारा वर्ष 2005, 2006,2007,2009 में और संस्कृति संचालनालय द्वारा  वर्ष 2010 में कत्थक कार्यशालाओं का आयोजन। इन कार्यशालाओं में विजया जी की प्रतिभागिता कथक नृत्य की मंचीय प्रस्तुति के साथ साथ विभिन्न शोध पत्रों का वाचन और प्रकाशन के साथ रही। विषय विशेषज्ञ के रूप में भी बतौर वक्ता आपको आमंत्रित किया गया।

इसके अतिरिक्त कथक नृत्य पर विजया जी के राष्ट्रीय स्तर पर अनेक शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं, यथा :

•  कला वार्ता पत्रिका में ” कथक की रायगढ़ परम्परा का विस्तार”

•  गुरु शिष्य परम्परा पर ग्वालियर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में  “गुरु तू सरीखा कोई नहीं”

•  शास्त्रीय संगीत और नवाचार में प्रकाशित “कत्थक नृत्य और नवाचार”

•  राष्ट्रीय संगोष्ठी नई दिल्ली “कला, कलाकार और पुरस्कार”

•  “कथक के ईशदूत राजा चक्रधर सिंह”

•  राष्ट्रीय संगोष्ठी 2001 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़, छग में “कथक नृत्य शैली के ताल पक्ष का सौंदर्य” आदि

डॉ विजया ने कथक और बैले के साथ नवाचार करते हुए महाकवि निराला, माखनलाल चतुर्वेदी, सूरदास, सुभद्रा कुमारी चौहान, तुलसी दास, पद्माकर, कालिदास, मुकुट धर पांडेय,मीरा,कबीर, ईसुरी आदि की रचनाओं पर अभिनव प्रस्तुति दी है।  रानी रूपमति और बाज बहादुर, पद्मावती,राम की शक्तिपूजा, झांसी की रानी, नर्मदा अष्टकम, अग्रसेन गाथा, पशुपति, गीतिका और गीत रामायण आदि विषयों पर आधारित कथक बैले किया है। कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं पर आधारित काव्य रंग की कोरियोग्राफी भी आपने की है। मंचीय प्रस्तुति के साथ साथ विजया जी ने ख्याल गाथा नामक कुमार शाहनी की कला फिल्म में कथक नृत्यांगना का किरदार निभाया जिसे 1990 अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह रॉटरडम (नीदरलैंड) में पुरस्कृत किया गया तथा भारत में प्रख्यात फिल्म फेयर का बेस्ट फिल्म (क्रिटिक )अवार्ड मिला।

गोवा, दिल्ली, गुलबर्गा, मिजोरम और मध्यप्रदेश में विजया जी के 70 से अधिक व्याख्यान हो चुके हैं। और कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचीय प्रस्तुतियां भी उन्होंने दी हैं। वे उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत कला अकादमी संस्कृति विभाग भोपाल में तीन वर्ष तक सदस्य , सीसीआरटी और भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति के लिए निर्णायक मंडल की सदस्य रहीं हैं।  विजया जी ने कत्थक को अंतरराष्ट्रीय मंचों से लेकर भारत के कस्बाई स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमूमन शोहरत पाने के बाद लोग छोटे स्तरों पर अपनी प्रस्तुति देने से गुरेज रखते हैं। लेकिन इनके साथ ऐसा नहीं है बल्कि इनका मानना है कि छोटी जगहों पर भारतीय कला और संस्कृति को सीखने की उत्कंठा बनिस्बत अधिक होती है।

डॉ विजया शर्मा जी वर्तमान में शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय भोपाल में नृत्य विभाग की विभागाध्यक्ष हैं। उन्हें कई सम्मानों तथा पुरस्कारों से से नवाज़ा गया है। कुछ प्रमुख पुरस्कार पर इस प्रकार हैं :

•   श्रृंगार मणि: सुर सिंगार संसद, मुम्बई 1992

•   समता प्रतिभा सम्मान, भोपाल 1995

•  एआईडब्ल्यूसी, भोपाल  2005

•   लायंस क्लब, भोपाल दक्षिण  2006

•   ममता राजपूत मेमोरियल अवॉर्ड  2006

•  लायनेस क्लब भोपाल 2006

•   एकता सम्मान 2007

•   नृत्य कला मनीषी सम्मान 2013

•   आस्था फाउंडेशन ट्रस्ट बैंगलुरू द्वारा अकादमी पुरस्कार 2018

•   भारत भूषण सम्मान 2019 राष्ट्रीय संस्थान अदम्य मुम्बई

•   उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत कला अकादमी संस्कृति विभाग भोपाल में तीन वर्ष तक सदस्य

•   सीसीआरटी और भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्ति की ज्यूरी सदस्यआदि।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति-

•   फ़ेस्टिवल आफ इंडिया यूएसएसआर मास्को 1988 भारत सरकार

•   अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम चीन 1998

•   अंतरराष्ट्रीय मेला ऊरुंची चीन  2004 आदि

भारत में मंचीय प्रस्तुति के कुछ उदाहरण-

•   मप्र कला परिषद द्वारा आयोजित खजुराहो नृत्य में 1994,2007,2018 में सहभागिता

•   कालिदास समारोह में 1996,2006

•   संगीत नाटक अकादमी दिल्ली द्वारा भारतीय अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समारोह 1990

•  उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत अकादमी  भोपाल द्वारा आयोजित कथक एवं कविता,

•   भक्ति प्रवाह बैले भावनगर 2018

•   भक्ति प्रवाह बैले अमृतसर 2019

•   गुरु पूर्णिमा महोत्सव नरसिंहगढ़ 2019 आदि प्रस्तुतियां उल्लेखनीय हैं।

संदर्भ स्रोत: विजया जी से वन्दना दवे की बातचीत के आधार पर।

श्रीमती दवे स्वतंत्र पत्रकार हैं।

© मीडियाटिक

 

 

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