डॉ. गीता शॉ

जन्म: 26 अक्टूबर, स्थान: जबलपुर. माता: श्रीमती पदमा पटरथ, पिता: माधवन ए पटरथ. जीवन साथी: रॉबिन शॉ पुष्प. शिक्षा: बी.एस.सी. (होम साइंस), जबलपुर यूनिवर्सिटी, एम.एस.सी (होम साइंस-फूड एंड न्यूट्रिशन) मद्रास यूनिवर्सिटी, पीएचडी-पटना यूनिवर्सिटी. व्यवसाय: स्वतंत्र लेखन. करियर यात्रा: 1964 से 65 तक होम साइंस कॉलेज जबलपुर में व्याख्याता, 1966 से 2003 तक स्नातकोत्तर गृह विज्ञान विभाग मगध महिला कॉलेज, पटना यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया. कॉलेज में अध्यापन के साथ लेखन भी करती रही. पहली कविता “बरसात आ गई रे” 1957 में धर्मयुग में प्रकाशित एवं पुरस्कृत. पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, दूरदर्शन के लिए लेखन कार्य (विशेषकर हास्य व्यंग्य, बाल साहित्य, महिला उपयोगी साहित्य). उपलब्धियां/पुरस्कार: 6 साहित्यिक व 3 बाल उपन्यास प्रकाशित, संपादित- राबिन शॉ पुष्प रचनावली (छह खंडो में), देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, आकाशवाणी पटना, इलाहाबाद विविध भारती, बीबीसी लंदन से हास्य व्यंग्य, नाटिकाएं, वार्ताएं, परिचर्चा प्रसारित, हिन्दुस्तान अखबार में लगातार पांच वर्ष तक हास्य व्यंग्य कालम चटपटी का प्रकाशन, कहानी झूलन मामा महाराष्ट्र सरकार की चौथी कक्षा की हिन्दी पाठ्य पुस्तक बाल भारतीय में संकलित. बिहार सरकार राजभाषा विभाग द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत (1982),  बिहार राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा साहित्य साधना सम्मान एवं पुरस्कार (2003), बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा शताब्दी सम्मान (2019), महाकवि काशीनाथ पांडेय शिखर सम्मान साहित्य के लिए (2019). विदेश यात्रा: नेपाल. रुचियां: पठन-पाठन, लेखन, अभिनय, मिमिक्री, कुकिंग. अन्य जानकारी:  स्कूल से स्नातकोत्तर स्तर तक की गृह विज्ञान विषयक किताबें लिखीं जो कोर्स में सम्मिलित. लेखन के अलावा समाज सेवा के कार्यों में रुचि. पता: 2/एल/45, बहादुरपुर हाऊसिंग कालोनी, पटना-26 बिहार. ई-मेल: geetapushpshaw@gmail.com

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