जुधईया बाई बैगा

जन्म: 01 जनवरी, स्थान: ग्राम लोढ़ा (उमरिया). माता: स्व. भूरी बाई बैगा, पिता: स्व. टंकरिया बैगा. जीवन साथी: स्व. मईकू बैगा. संतान: पुत्र -02, पुत्री -01. शिक्षा: अशिक्षित (चित्रकार आशीष स्वामी द्वारा 70 वर्ष की आयु में कला का प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन). व्यवसाय: आदिवासी भित्ति चित्रकार. करियर यात्रा: कन्हागढ़ केरल में चित्र कार्यशाला, भारत भवन भोपाल में आदिवासी चित्र कार्यशाला में हिस्सेदारी, जनजातीय संग्रहालय भोपाल में भित्ति चित्रों का स्थाई संग्रह, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली द्वारा आयोजित आदिरंग महोत्सव शांति निकेतन (प.बंगाल) में साझेदारी, बिहार संग्रहालय पटना में चित्र कार्यशाला में मुख्य कलाकार, ललित कला अकादमी दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी कला शिविर में साझेदारी, कालिदास अकादमी उज्जैन द्वारा आयोजित वनजन कला शिविर में हिस्सेदारी,  राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले आयोजनों में पेंटिंग्स का प्रदर्शन. उपलब्धियां/पुरस्कार: राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय परंपरागत आर्ट गैलरी के आयोजन में मिलान (इटली), पेरिस (फ्रांस) शहर में आयोजित आर्ट गैलरी में तथा इंग्लैण्ड, अमेरिका एवं जापान आदि देशों में इनके द्वारा बनाई गई बैगा जनजाति की परंपरागत पेटिंग्स की प्रदर्शनी लग चुकी हैं. गणतंत्र दिवस पर उमरिया कलेक्टर द्वारा सम्मान, मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित प्रतिभा खोज में शहडोल संभाग से प्रथम स्थान एवं उज्जैन कुंभ में सम्मानित, विंध्य मैकल लोक रंग महोत्सव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सम्मानित, वरिष्ठ चित्रकार पद्मश्री श्याम सुन्दर शर्मा से सम्मानित. विदेश यात्रा: स्वयं विदेश यात्रा नहीं की लेकिन मिलान (इटली),  पेरिस (फ्रांस) में  चित्रों की प्रदर्शनी,  देश-विदेश में चित्रों का संग्रह. रुचियां: आदिवासी नृत्य संगीत एवं संस्कृति में रुचि. अन्य जानकारी: बैगा जनजाति की पहली अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी महिला चित्रकार होने का गौरव, प्रदेश शासन द्वारा इन्हें राष्ट्रीय मानव की श्रेणी में रखा गया है. जुधइया बाई का नाम जिला प्रशासन द्वारा पद्मश्री अवार्ड के लिए नामांकित किया गया है. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय भोपाल में जुधइया बाई के नाम से एक स्थाई दीवार बनी है, जिस पर इनके बनाए चित्र अंकित हैं. प्रदेश के तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान न सिर्फ जुधइया बाई को सम्मानित कर चुके हैं, बल्कि वे उनसे मिलने लोढ़ा (उनके कर्मस्थल) भी पहुंच गए थे. उनकी चित्रकारी को उनके गुरु आशीष स्वामी ने तराशने का काम किया है. विदेशों में लगी उनके चित्रों की प्रदर्शनी की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने अपनी तरफ से कोई कोशिश नहीं की, बल्कि उनकी कलाकृतियां ही ऐसी थीं, जिससे प्रभावित होकर लोगों ने उसे वहां तक पहुंचा दिया. पता: फाटक टोला, ग्राम लोढ़ा, तहसील- बांधवगढ़, जि. उमरिया म.प्र.-60.  ई-मेल: bandhawgarhsbaiga@gmail.com

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