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जिस छोटी झील में पिता पकड़ते थे मछली, उसी में से 3 बाथम बेटियों ने निकाले 17 मेडल

जिस छोटी झील में पिता पकड़ते थे मछली, उसी में से 3 बाथम बेटियों ने निकाले 17 मेडल

छाया: दैनिक भास्कर  

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जिस छोटी झील में पिता पकड़ते थे मछली, उसी में से 3 बाथम बेटियों ने निकाले 17 मेडल

• बचपन में ही सीख लिया था पानी से खेलना

भोपाल। यह तीनों बचपन से ही अपने-अपने पिता के साथ तालाब जाती थीं, उसी दौरान इन्होंने पानी से खेलना सीख लिया था। बाकी का काम यहीं पर चलने वाले एडवेंचर स्पोर्ट्स क्लब ने पूरा कर दिया। यहां के कोच कुलदीप ने इन्हें साल भर के भीतर कयाकिंग-केनोइंग, ड्रेगन बोट और सलालम की ऐसी बारीकियां सिखाईं की तीनों ने 12 से ज्यादा मेडल जीत डाले।

भाई के साथ नाव चलाना सीखा – कुमकुम

कयाकिंग-केनोइंग करते हुए 11 महीने ही हुए हैं। इसके बाद भी ड्रेगन बोट और सलालम जैसे साहसिक खेल में कुल 9 नेशनल मेडल अपने नाम किए। छोटी झील में कुमकुम ने 1 गोल्ड, 4 सिल्वर व 1 ब्रान्ज जीता है। वे कहती हैं कि पिता मुकेश बाथम अच्छे स्विमर हैं। पहले छोटी झील में मछली का काम करते थे। हमारे घर की नाव है, इसलिए मैंने भाई के साथ नाव चलाना सीख लिया था। अभी मैं 12वीं की पढ़ाई कर रही हूं।

नाव चलाने और बोट चलाने में अंतर है – सानिया

एक साल हुआ है वाटर स्पोर्ट्स सीखते हुए। छोटी झील में हाल ही में 7 मेडल जीते हैं। इसमें 2 गोल्ड, 4 सिल्वर व 1 ब्रान्ज शामिल हैं। सानिया बताती हैं कि पिता नरेश बाथम प्राइवेट जॉब करते हैं। साथ ही डॉग  रीडर हैं। पहले छोटी झील में मछली का काम करते थे। मैं 10वीं की छात्रा हूं। मैंने बचपन में ही पिता के साथ जाकर पानी से खेलना सीख लिया था। नाव चलाना व कयाकिंग-केनोइंग बोट, सलालम बोट चलाना अलग-अलग है। 

पानी से पुश्तैनी नाता, इसलिए यह खेल भाया – वंशिका

वंशिका को भी इस खेल में अभी सालभर ही हुआ है और एक गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। सरोजिनी नायडू कॉलेज से ग्रेजुएशन कर चुकीं वंशिका के पिता सुनील बाथम का 4 साल पहले बीमारी से निधन हो गया। वंशिका कहती हैं कि पहले पापा छोटी झील में मछली पकड़ने का काम करते थे। पानी से पुश्तैनी नाता है, इसलिए यह खेल मुझे खूब भाता है। आगे देश के लिए खेलना चाहूंगी और पदक जीतना चाहूंगी।

कोच कुलदीप कीर बोले-एडवेंचर क्लब शुरू किए सालभर हुआ है। क्लब ने छोटी सी अवधि में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तीनों बाथम बेटियों के अलावा अंजली चंदना ने 3 गोल्ड, 3 सिल्वर व रागिनी मालवीय ने 3 सिल्वर, 1 ब्रान्ज जीता है। इस टूर्नामेंट में हमारे खिलाड़ियों ने 27 पदक जीते हैं।

संदर्भ स्रोत –दैनिक भास्कर 

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