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घर का काम पुरुषों और महिलाओं में समान रूप से बांटा जाए : जस्टिस भट

घर का काम पुरुषों और महिलाओं में समान रूप से बांटा जाए : जस्टिस भट

छाया: बार एंड बेंच.कॉम

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घर का काम पुरुषों और महिलाओं में समान रूप से बांटा जाए : जस्टिस भट

अदालतों में महिलाओं की कम भागीदारी पर चिंता जताई

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस रवींद्र भट ने न्यायपालिका में महिलाओं  की बहुत कम भागीदारी को चिंताजनक बताया है। जस्टिस भट ने इसकी एक वजह महिलाओं पर घरेलू कामकाम की एकतरफा जिम्मेदारी होना बताया है। उन्होंने समाधान सुझाते हुए कहा कि घर के कामकाज को पुरुषों और महिलाओं में बराबर-बराबर बांटा जाना चाहिए। जस्टिस भट पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के ‘वूमेन इन पावर एंड डिसीजन मेकिंग’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में महिलाओं के साथ भेदभाव वास्तविकता है। इसे दूर करने की जरूरत है। न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कमी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भले ही मद्रास हाई कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या सबसे अधिक है, फिर भी जितना होना चाहिए,  उसके करीब भी नहीं है। जस्टिस भट ने कहा, ‘जब न्यायपालिका की बात आती है, तो ऐतिहासिक रूप से लैंगिक प्रतिनिधित्व एक चिंता का विषय रहा है। तमिलनाडु में महिला जजों की संख्या सबसे ज्यादा है, लेकिन जितनी जरूरत है, उसके करीब नहीं है। महिलाओं के साथ भेदभाव बिलकुल स्पष्ट है।‘ अदालतों में इसके लिए बाधाओं का जिक्र करते हुए जस्टिस भट ने कहा कि घर का कामकाज महिलाओं को अन्य कारोबार में अधिक जिम्मेदार पदों पर जाने में रुकावट बनता है। उन्होंने कहा घरेलू उम्मीदें, जो महिलाओं पर असमान रूप से बोझ डालती हैं, उन्हें अपरिहार्य के रूप में नहीं देखा जा सकता है। इसके बजाय प्रयास एक ऐसे समाज की ओर बढ़ने का होना चाहिए, जो घरेलू कामकाज का अधिक समान विभाजन को पहचानता और प्राथमिकता देता है। न्यायाधीश ने कहा निस्संदेह, महिलाओं के पास नेतृत्व होने से अधिक महिलाओं के लिए रास्ता खुलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें पहले स्थान पर लाना होगा और इसकी पहल समाज को ही करनी चाहिए।

घर की जिम्मेदारी पुरुषों और महिलाओं में समान नहीं

जस्टिस भट ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में यह माना कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ की जीवन शैली एक संभावित समाधान हो सकता है, लेकिन यह महिलाओं के लिए अधिक परेशानी का कारण भी बन गया है’ क्योंकि घरेलू जिम्मेदारियां पुरुष और महिला के बीच समान रूप से विभाजित नहीं हैं। जस्टिस भट ने कहा घरेलू कामकाज महिलाओं पर अत्यधिक बोझ डालती है। इससे उनमें थकान और मानसिक दबाव बढ़ता है, इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। अपने संबोधन के शुरुआत में उन्होंने इस विडम्बना की और भी इशारा किया कि महिलाओं पर आधारित इस कार्यक्रम का उद्घाटन एक पुरुष द्वारा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह प्रयास केवल महिलाओं पर निर्देशित नहीं किये जा सकते। इसके लिए पुरुषों को भी आगे आना जरुरी है।  

संदर्भ स्रोत –दैनिक भास्कर 

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