गीता पराग

जन्म: 7 अगस्त, स्थान: खेड़ा (शाजापुर). माता: श्रीमती लीलाबाई, पिता: श्री देवकरण जी. जीवन साथी: श्री सिंगाराम पराग. संतान: पुत्र -01, पुत्री -01. शिक्षा: 10वीं. व्यवसाय: लोक गायिका. करियर यात्रा: विगत 18 वर्षों से लोकगीतों के माध्यम से जनजागृति कार्य में संलग्न. उपलब्धियां/पुरस्कार: सम्मान- संस्कृति विभाग भोपाल द्वारा कबीर महोत्सव पर प्रस्तुति के लिए सम्मानित, कबीर गायन को जीवित रखने के लिए प्रोफेसर लिंडा हैस स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका, एकलव्य संस्थान और संवाद वाहिनी संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से सम्मानित. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नेहरू युवा केन्द्र द्वारा कबीर गायन के लिए सम्मानित, जिला महिला बाल विकास विभाग द्वारा लोकगीत एवं कबीर गायन के लिए सम्मानित, तहसील एवं महिला बाल विकास टोंकखुर्द द्वारा लोकगीत एवं कबीर गायन के लिए सम्मानित. प्रस्तुतियां – भारत भवन और रविंद्र भवन भोपाल, म.प्र. भोजपुरी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित निर्गुण सांस्कृतिक समारोह- देवास, मप्र स्थापना दिवस भोपाल, भारत पर्व भोपालएकलव्य संस्थान द्वारा मध्यप्रदेश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में कबीर भजन की प्रस्तुतियाँ, नगर निगम देवास द्वारा विक्रम कला भवन में आयोजित कार्यक्रम में लोक गीतों की प्रस्तुति. रुचियां: संगीत एवं धार्मिक कार्य एवं कबीर भजन. अन्य जानकारी: गीता पराग ने शादी के बाद संगीत का सफर शुरू किया. अपनी सास लीला पराग से प्रेरित होकर उन्होंने लोकगीत और कबीर को गाना शुरू किया. पहले वे समूह में गायन करती थीं, धीरे-धीरे संगीत, गीता जी का जुनून बन गया. रूढ़िवादिता, पुरुष प्रधान समाज और ग्रामीण क्षेत्र से आने के कारण प्रारम्भ में उन्हें मंच पर बाहर गाने गाने से रोका गया, लेकिन उन्होंने अपने जुनून के लिए समाज के खिलाफ लड़ने का फैसला किया. आज उनका पूरा परिवार गाने पर उनका साथ देता है. टोंकखुर्द तहसील के छोटे से गांव बिसलखेड़ी की सामान्य गृहिणी गीता पराग अपनी सास के साथ मिलकर अनूठे तरीके (लोकगीत और कबीरदास जी के निर्गुणी भजन गाकर) नशामुक्ति, बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का संदेश देते हुए समाज में जन जागृति का लाने का काम कर रही हैं. पता: विसलखेड़ी, आगारोद रोड, टोंकखुर्द, देवास -16. ई-मेल: kabirgeetaparag@gmail.com

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