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खेलने कूदने की उम्र में पलक ने लगा दिए मेडल्स के ढेर

खेलने कूदने की उम्र में पलक ने लगा दिए मेडल्स के ढेर

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खेलने कूदने की उम्र में पलक ने लगा दिए मेडल्स के ढेर

भोपाल। किशोरावस्था में आने के बाद ही अक्सर बच्चे अपने कॅरियर के बारे में विचार करना शुरू करते हैं, लेकिन 14 साल की पलक शर्मा ने इस उम्र में कामयाबी हासिल कर कई खिताब अपने नाम कर लिए हैं। पलक गोताखोरी में सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय स्पर्धा में दिग्गजों को मात देते हुए आगे बढ़ रही हैं। पलक ने तीन साल की उम्र में ही तैरना शुरू कर दिया था। फिर आठ साल की उम्र में गोताखोर बन गईं। आज वह कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय गोताखोर बन गई। पलक के पिता पंकज शर्मा ने बताया कि पलक ने लगातार चार साल तक सिर्फ प्रैक्टिस की। जब वह 12 वर्ष की हुई, तब उसे प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिला। अब तक वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 24 गोल्ड, सात सिल्वर एवं ब्रोंज मेडल जीत चुकी हैं। पलक एशियन एज ग्रुप प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली देश की सबसे कम उम्र की महिला गोताखोर बनीं। अब पलक का सपना ओलंपिक के लिए गोल्ड जीता है।

• रोजाना करती हैं आठ घंटे की प्रैक्टिस

पलक ने बताया कि वह अपने कोच रमेश व्यास के मार्गदर्शन में रोजाना आठ घंटे की प्रैक्टिस करती हैं। खेल के अलावा स्टडी पर भी पूरा फोकस करती हैं। वह कहती हैं कि माता-पिता ने हमेशा हौसला बढ़ाया, यह उनकी ताकत है। खेल में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भी मिल चुका है। वह प्रदेश में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबसेडर भी हैं। जूनियर वर्ग की राष्ट्रीय स्पर्धाओं में वह अब तक कुल 14 स्वर्ण जीत चुकी हैं।

संदर्भ स्रोत –पत्रिका  

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