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एशियन तलरबाजी चैम्पियनशिप- प्रज्ञा ने जीता रजत, रागिनी एशियन गेम्स के लिए भारतीय संभावित टीम में शामिल

एशियन तलरबाजी चैम्पियनशिप- प्रज्ञा ने जीता रजत, रागिनी एशियन गेम्स के लिए भारतीय संभावित टीम में शामिल

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एशियन तलरबाजी  चैपियनशिप में पन्ना की बेटी ने जीता रजत

जबलपुर की रागिनी एशियन गेम्स के लिए भारतीय संभावित टीम में शामिल

भोपाल। मध्यप्रदेश की बेटियां अपनी मेहनत और लगन से अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचकर देश का नाम रोशन कर रही हैं। एक और जहां दुनिया में बेशकीमती हीरों के लिये प्रसिद्ध पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम निवारी की प्रज्ञा ने एशियन फेसिंग चैपियनशिप (तलवारबाजी) प्रतियोगिता में अपना करतब दिखाते हुये देश के लिये सिल्वर पदक जीता वहीं जबलपुर की रागिनी मार्को 22 साल की उम्र में आज देश की बेहतरीन महिला तीरंदाजों में शामिल हैं। उन्हें इस साल चीन में खेले जाने वाले एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम के संभावितों में चुना गया है।

प्रज्ञा सिंह 

प्रज्ञा ने 24 फरवरी से 3 मार्च तक ताशकंद उज्बेकिस्तान में खेली गई एशियन फेसिंग चैपियनशिप में खिलाड़ी के साथ खेलते हुये 45-36 के स्कोर के साथ सिल्वर मेडल प्राप्त किया। प्रज्ञा का यह पहला अंर्तराष्ट्रीय पदक है, अब तक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 11 पदक जीत चुकी है। वह राज्य तलवाबाजी अकादमी मध्य प्रदेश के मुख्य कोच भूपेन्द्र सिंह चौहान के मार्गदर्शन में तलवारबाजी के खेल की बारीकियां सीख रही है। प्रदेश की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने तलवारबाजी खिलाड़ी प्रज्ञा सिंह कों एशियाई तलवारबाजी चैपियनशिप में रजत पदक जीतने पर बधाई दी है।

तलवारबाजी का नाम भी नही सुना था लेकिन जब पकड़ी तो लगन बढ़ती गई

देश को रजत पदक दिलाने वाली प्रज्ञा सिंह के पिता नरेन्द्र सिंह चौहान एक साधारण किसान हैं। 18 वर्षीय प्रज्ञा अपने पिता की चौथी पुत्री है। प्रज्ञा ने बताया कि मैंने कभी तलवारबाजी का नाम नही सुना था। मध्य प्रदेश टेलेन्ट सर्च के बारे में बहिन के ससुराल वालों ने बताया जिसके बाद पहली बार तलवार पकड़ी और ट्रायल शुरू किया। धीरे-धीरे रूझान बढ़ता गया। वर्ष 2016 में रियो ओलंपिक के विजेता को झण्डा ओढ़े हुए अपना इंटरव्यू देते हुए देखा तो सोचा कि मुझे भी ऐसा ही बनना है। सब कुछ छोडक़र ट्रेनिंग पर ध्यान दिया। गांव से भोपाल आकर खूब मेहनत की। परिवार के सदस्यों की हौसला अफजाई तथा खेल प्रशिक्षक के मार्गदर्शन ने मुझे देश के लिये पदक जीतने का सौभाग्य दिया है। मेरा सपना ओलंपिक तक पहुंचकर देश के लिये पदक अर्जित करने का है।

रागिनी मार्को 

दूसरी और जबलपुर की रागिनी मार्को 22 साल की उम्र में आज देश की बेहतरीन महिला तीरंदाजों में शामिल हैं। अपनी मेहनत, लगन और कड़े अभ्यास की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। यही कारण है कि इस साल चीन में खेले जाने वाले एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम के संभावितों में उन्हें चुना गया है। वह सोनीपत में देश के चुनिंदा तीरंदाजों के साथ मुख्य टीम का हिस्सा बनने के लिए पसीना बहा रहीं हैं। रागिनी ने 17 साल की उम्र में तीरंदाजी एरिना में कदम रखा था और 19 साल की उम्र में देश के लिए पहला स्वर्ण जीता।

प्रतिभा खोज चयन स्पर्धा से अकादमी में मिला प्रवेश

14 अप्रैल 2000 में जबलपुर के कुंडम में जन्मीं रागिनी दो बहन, एक भाई में सबसे बड़ी हैं। पुलिस में पदस्थ एएसआइ मान सिंह व माता रेखा की सुपुत्री रागिनी थ्रोबाल में स्कूल राष्ट्रीय खेलों मंए प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं हैं। इसके बाद पिता की प्रेरणा से व्यक्तिगत खेल तीरंदाजी में भाग्य आजमाया और पहली बार रानीताल (जबलपुर) स्थित मप्र राज्य तीरंदाजी अकादमी में प्रतिभा खोज चयन स्पर्धा के माध्यम से 2017 में प्रवेश मिला। कोच रिचपाल सिंह सलारिया के मार्गदर्शन के बाद इस उदीयमान अंतराष्ट्रीय तीरंदाज ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।

यूथ वर्ल्ड चैंपियनश‍िप से शुरू हुआ स्वर्णिम सफर

महज दो साल में लक्ष्य भेदने में सफल रागिनी ने देश के लिए पहला स्वर्ण मैडिड (स्पेन) में विश्व यूथ तीरंदाजी स्पर्धा के मिश्रित कंपाउंड टीम इवेंट में जीता। जबलपुर के श्रीजानकीरमण कॉलेज में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा रागिनी खेल के साथ ही साथ पढ़ाई को भी पूरा समय देतीं हैं। उच्च शिक्षा की पढ़ाई जारी रखते हुए वे आगे एमए करना चाहती हैं।यह भी पढ़ें

जीत चुकी हैं 15 पदक

तीरंदाज रागिनी अंतराष्ट्रीय स्पर्धा में एक स्वर्ण पदक जीतने के साथ राष्ट्रीय तीरंदाजी और अखिल भारतीय अंतर विवि खेलों में भी 15 से अधिक पदक जीत चुकीं हैं।

सन्दर्भ स्रोत- दैनिक भास्कर/नई दुनिया 

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