अस्मिता चौरसिया

जबलपुर, की अस्मिता चौरसिया ‘शैली’ मध्यप्रदेश हस्तशिल्प, हथकरघा विकास निगम की रजिस्टर्ड पेशेवर कलाकार हैं। भारत की लोक कलाएं बनाने में विशेष रुचि रखती हैं। गोंड, वरली, मधुबनी, अल्पना, टिकुली,  पिछवई, सौरा, फड़, कलमकारी, कांगड़ा जैसी सुंदर लोक कलाओं से इन्होंने स्वनिर्मित शीट्स, कैनवास, जूट बैग्स, परिधान, मिट्टी के पॉट, तवा, पटे, बुकमार्क्स, ग्रीटिंग कार्ड्स, लिफ़ाफे, दीवार आदि भी सजाए हैं। इन कृतियों के विक्रय के जरिये अस्मिता का मुख्य उद्देश्य लोक कलाओं को घर-घर तक पहुंचाना, इनके प्रति आकर्षण और रुचि जगाना है। लोककलाओं के अलावा इनके रियलिस्टिक चित्रण भी बहुत खूबसूरत हैं।

  • वरली लोक कला महाराष्ट्र के ठाणे जिले की जनजाति वरली की देन है।इसमें मानव आकृतियां त्रिभुज को मिलाकर बनाई जाती हैं। इसमें मुख्य रूप से फसल पैदावार, उत्सव ,प्रकृति चित्रण, नृत्य आदि चित्रण किया जाता है।प्राकृतिक रंगों के स्थान पर अब कृत्रिम रंग पेंट का उपयोग भी किया जाने लगा है।
  • मध्य प्रदेश की गोंड लोक कला बहुत रंगीन होती है।इसे अपनी कल्पना से कितना भी रंगीन बनाया जा सकता है। आकृतियों के अंदर बारीक धारियां, बिंदियां, अन्य ज्यामितीय नमूने भरे जाते हैं।
  • पिछवाई लोक कला राजस्थान की प्रसिद्ध हस्तकलाओं में से एक है ।नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में मूर्ति के पीछे दीवाल पर वृहत् कपड़े पर इन चित्रों का चित्रण किया जाता है इसमें श्री कृष्ण रासलीला, प्रकृति चित्रण, कमल ताल में गौ अधिकतर देखने को मिलते हैं।
  • मधुबनी लोक कला बिहार के मधुबनी ग्राम की पुश्तों पुरानी कला है, यह पूरे मिथिला क्षेत्र में फैली हुई है। इसमें बारीक रेखाओं का दोहराव, बड़ी आंखें, सुंदर रंग संयोजन इसकी मुख्य विशेषताएं हैं।
  • टिकुली लोक कला बिहार की ही बेहतरीन शिल्प कलाओं में से एक है। पहले बिंदी (टिकली)पर बनने वाली यह कला अब अपने बदलते हुए स्वरूप में पुनर्जीवित होकर कलाकृतियों का रूप ले चुकी है।
  • कांगड़ा चित्र शैली पहाड़ी चित्रकला का एक भाग है। यह कांगड़ा (हिमाचल)रजवाड़े दौर की देन है। इसमें अत्यंत महीन रेखांकन विस्मयकारी लगता है। भारतीय परंपरानुसार नारी के महीन वस्त्र, सुंदर मुखाकृति, लयमान उंगलियां, सौम्य भाव दृष्टिगोचर होते हैं।
  • अल्पना बंगाल की प्रसिद्ध लोक कला है। इसमें कुछ धार्मिक प्रतीक जैसे शंख, कमल, मयूर, मीन, दीपक इत्यादि अवश्य बनाए जाते हैं। इसकी पृष्ठभूमि गेरूआ, लाल होती है फिर इसमें चावल के घोल से सफेद डिजाइन बनाते हैं। नवाचार के चलते इसे अन्य रंग पेंट से भी बनाया जाने लगा है।
  • जूट बैग्स पर मधुबनी चित्रकारी