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क्लाइमेटफोर्स अंटार्कटिक अभियान में शामिल हुई ईशानी ने साझा किए अनुभव

क्लाइमेटफोर्स अंटार्कटिक अभियान में शामिल हुई ईशानी ने साझा किए अनुभव

छाया: आईटीडीसी इंडिया डॉट कॉम 

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क्लाइमेटफोर्स अंटार्कटिक अभियान में शामिल हुई ईशानी ने साझा किए अनुभव

 17 से 28 मार्च 2022 के बीच आयोजित बारह दिवसीय 2041 क्लाइमेटफोर्स अंटार्कटिक अभियान में शामिल हुई भोपाल की 26 वर्षीय ईशानी पालंदुरकर भारत की पहली महिला हैं, जो अंटार्कटिका में उतरी। ईशानी इस कैंपेन के लिए चुने जाने वाले दुनिया भर के 150 प्रतिभागियों में से एक थीं। कैंपेन का नेतृत्व विश्व प्रसिद्ध खोजकर्ता और पर्यावरणविद्, रॉबर्ट स्वान (ओबीई, एफआरजीएस), 2041 फाउंडेशन के संस्थापक और उनके बेटे, बार्नी स्वान, क्लाइमेट फोर्स के संस्थापक ने किया था। 

इस अभियान के दौरान अंटार्कटिका संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए उन्होंने 15,000 डॉलर जुटाने के लिए एक साल तक काम किया। यह अभियान क्लाइमेट चेंज पर एक कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम है। अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए ईशानी ने बताया कि खुद अपनी यात्रा के दौरान क्लाइमेट चेंज के प्रभावों को भी महसूस किया। ईशानी इस समय ड्यूक यूनिवर्सिटी, यूएसए में मास्टर की स्टूडेंट है और पर्यावरण अर्थशास्त्र और नीति का अध्ययन कर रही है। ईशानी ने भारत में वायु प्रदूषण, एनर्जी एक्सेस और क्लाइमेट पॉलिसी के क्षेत्र में काम किया है। वह 2016 से सक्रिय रूप से जलवायु कार्रवाई पर काम कर रही हैं।

अंटार्कटिका ट्रीटी सिस्टम के नवीनीकरण की जरूरत

ईशानी ने बताया कि मार्च के महीने में अंटार्कटिका में गर्मी होती है। फिर भी वहां माइनस -15 डिग्री टेम्प्रेचर में हमने आइसलैंड ट्रेवल किए। साथ ही वहां बर्फ में करीब 4 फीट की गहराई में चलना होता था। तीन से चार लेयर के कपड़े पहनकर पूरा सफर तय किया। ईशानी ने अंटार्कटिका में हुए सेशंस में सीखा कि जलवायु परिवर्तन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसके वन्यजीवों को कैसे प्रभावित कर रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघलते हैं और टूटते हैं और वन्यजीवों और वन्यजीवों के भोजन चक्र को बाधित करते हैं। उन्होंने बताया कि क्रिल की आबादी में कमी भी चिंताजनक है, क्योंकि पेंगुइन सहित कई प्रजातियां अपने भोजन के लिए क्रिल और मछलियों पर निर्भर हैं। ईशानी ने बताया कि अंटार्कटिका हमारे ग्रह का वैश्विक थर्मोस्टेट है, अगर इसमें गड़बड़ी हुई तो हम बिल्कुल भी नहीं बचेंगे। अंटार्कटिका ट्रीटी सिस्टम वर्तमान में अंटार्कटिका को मिनरल एक्सप्लोरेशन से बचा रही है, साल 2041 तक नवीनीकरण तैयार करना होगा।

संदर्भ स्रोत –पीपुल्स समाचार और आईटीडीसी इंडिया डॉट कॉम

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